आज कल हर कोई मॉर्डन रसोईघर का ही इस्तेमाल करता है, शहरो में तो ज्यादातर लोग fully furnished, modern  रसोईघर का इस्तेमाल करते है. लेकिन अगर कोई आप से कहे कि हम खाना पकाने के लिए रसोईघर का नहीं बल्कि टॉयलेट का इस्तेमाल करते है तो शायद ही आप उसके घर का खाना खाऐंगे या उसके हाथों का बना खाना खाऐंगे.

लेकिन मध्य प्रदेश की मंत्री इमरती देवी को इससे कोई परेशानी नहीं हैं, बल्कि उनका ये कहना है कि इस बात में कोई हरज़ नहीं की खाना टॉयलेट में बनाया गया हो.

दरअसल हुआ यूं कि, मध्य प्रदेश की एक आंगनवाड़ी में बच्चों के लिए खाना बनाने के लिए टॉयलेट का इस्तेमाल किया जा रहा था, और टॉयलेट में खाना बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तनों को टॉयलेट सीट पर ही रखे जाते हैं.

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इस मामले की शिकायत जब मध्य प्रदेश की मंत्री इमरती देवी को की गई तो उन्होंने इस पर बड़े आराम से ये बात कह दी के शौचालय में खाना बनने में कोई बुराई नहीं हैं, अगर टॉयलेट और गैस स्टोव के बीच ठीक विभाजन हो तो इमरती देवी ने पूछा, कि अगर आपके रिश्तेदार आपके घर में यह कहते हुए खाना खाने से मना कर दें कि आपके घर में अटैच किचन और बाथरुम है तो?

इमरती देवी ने कहा कि आपको इस बात को समझना चाहिए कि स्टोव और टॉयलेट सीट के बीच विभाजन हैं. आजकल सभी के घरों में अटैच किचन और बाथरूम होता हैं. मंत्री का आगे कहना हैं कि जिस टॉयलेट का इस्तोमाल रसोईघर कि तरह किया जा रहा था, उस टॉयलेट का इस्तेमाल शौचालय के रूप में नहीं किया जाता और इस टॉयलेट में बजरी भरी हुई हैं.

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टॉयलेट में भोजन तैयार करने के लिए एलपीजी सिलेंडर और मिट्टी के चूल्हे दोनों हैं. खाना पकाने के बर्तन साथ ही कुछ और चीज़ों को भी टॉयलेट सीट के ऊपर रखा गया था. जिले के महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने कहा कि एक स्वयं सहायता समूह ने टॉयलेट का जिम्मा ले लिया था और टॉयलेट को रसोईघर के रूप में इसका उपयोग कर रहा था.

आंगनबाड़ी सुपरवाइजर और इसमें शामिल कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. आंगनवाड़ी केंद्र भारतीय गांवों में बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करते हैं. यह भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का हिस्सा है.

इस मामले की जांच पड़ताल की जा रही हैं लेकिन अगर आगंनवाड़ी में पढ़ रहे बच्चों की सेहत के लिहाज़ से देखा जाए तो टॉयलेट किसी भी माता-पिता को ये बात रास नहीं आएगी के उनका बच्चा टॉयलेट में बना खाना खा रहा हो.

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