जैसे- जैसे चुनाव का सिलसिला शरु होता है वैसे ही नेताओं के सर पर चुनावी बुखार सवार हो जाता है. वो चुनावी प्रचार – प्रसार में इस कदर खो जाते है कि अपनी जुबान पर काबू नहीं कर पाते जब मंच पर मुंह के आगे माइक आ जाता है तो ना जाने हमारे देश के नेताओं को क्या हो जाता है. जनता के बीच जोश दिखाते हुए एक के बाद एक बयानों के ऐसे बाढ़ छूटते है कि सुनने वाला सुनकर ही धाराशाही हो जाता है मंच से अपने सामने खड़े उम्मीदवारों के लिए ऐसे बयान दिए जाते जो राजनाति के गिरते स्तर को दर्शाते है तो कभी हमारे नेता जनता से वोट के लिए लोकलुभावन तरीके अपनाते है जिसमें वो जनता से किसी लालच में वोट की अपील करते दिखाई देते है आज हम खोलेगें ऐसे नेताओं की पोल जो भूल जाते हैं अपनी जबान पर कंट्रोल ।

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कब – कब बिगड़े नेताओं के बोल ?

हम आपको बतात दें इसमें कोई एक नेता नहीं जिनके बोल मंच पर बिगड़े हो बल्कि सभी पार्टियों के नेता चुनावी मंच से जनता के बीच ऐसा माहौल बना देते है जैसे चुनाव नहीं कोई जंग हो जिसमें जीत के लिए वो किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है मुझे

‘आशीर्वाद दें, गुंडों के लिए बड़ी गुंडी बनकर दिखाऊंगी’

ये हैं यूपी की कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी और बदायूं से बीजेपी उम्मीदवार संघमित्रा मौर्य जो चुनावी प्रचार में इस कदर खो गई की अपने ही जबान पर काबू ना कर पाई उन्होंने चुनावी मंच से गुंडों से बड़ी गुंडी होने की बात कह डाली…

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‘मोदी- मोदी’ का नारा लगाने वालों के जबड़ तोड़ दो !

तो दूसरी और जेडीयू के नेता शिवलिंगा गौड़ा ने चुनावी प्रचार के दौरान गुंडागर्दी का वो माहौल बनाया कि मोदी- मोदी का नारा लगाने वाले लोगों के जबड़े तोटने की धमकी ही दें डाली ।

जयाप्रदा को लेकर की अभद्र टिप्पणी
लोकसभा चुनाव सिर पर है पर इस बीच कुछ नेताओं में इतना जोश है कि वो अपनी जबान पर भी लगाम नहीं लगा पा रहे है.यूपी के सपा नेता ने तो हद ही पार कर दी नेता जी फिरोज खान की जबान फिसली भी तो इतनी फिसली कि उन्होंने जयाप्रदा को ही लपेटे में ले लिया.अगर जयाप्रदा रामपुर आएंगी तो रामपुर वालों की शाम रंगीन हो जाएंगी ।

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आखिर क्यों हमारे राजनेता ऐसे बयान देते है जिसमें उनके प्रचार का तरीका इस कदर बिगड़ जाता है. कि वो अपनी जबान पर काबू खो जाते है ऐसे बयान नेता जानकर देते है या इसमें भी राजनीति छिपी होती है ।

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