चुनावी मौसम की शुरुआत होने के साथ ही नेताओं का प्रचार प्रसार करने का दौर शुरू हो चुका है. सभी पार्टियों में वंशवाद को आगे बढ़ाते हुए कई नए चहरे भी शामिल हो चुके है. जैसे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के बेटी ने भी अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए राजनीति में कदम रखा. तो वहीं कल राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को भी कांग्रस ने जोधपुर से चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया है.

ठीक ऐसे ही इस लिस्ट में कुछ नाम ऐसे भी शामिल है जिनके नाम भी आपने शायद ही सुने हो. वहीं अब इस लिस्ट में ऐसा ही एक और नाम शामिल हो गया है. जिसने वंशवाद को आगे बढ़ाते हुए राजनीति में कदम रख लिया है. जी हां ये जनाब हैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के पोते पार्थ पवार, लेकिन ये जनाब राजनीति में एंट्री लेने के साथ ही ट्रोल भी हो गए हैं. और उनके ट्रोल होने की वजह है उनकी अयोग्यता.

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जी हां पार्थ पवार, जो कि एक लिखे हुए भाषण को भी ठीक तरह से नहीं पढ़ पाए. और भाषण के दौरान कई दफा फंसते नजर आए. और आखिर में केवल 3 मिनट में अपना भाषण ही खत्म कर दिया.

अब लोगों को तो वैसे भी इंतजार रहता है कि कब कोई नेता कोई चूक और करे लोग उन्हें निशाना बना पाए. अब इस घटना के बाद लोगों को एक और मौका मिल गया. बस फिर क्या था लोगों ने पार्थ पवार को सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया.

एक ट्रोलर ने लिखा कि ये पहली बार है जब पवार रिवार का कोई नेता अपना भाषण ठीक तरीके से नहीं दे पाया. वहीं एक दूसरे ट्रोलर ने लिखा कि उसने कभी शरद पवार को भी भाषण के दौरान फंसते नही देखा.

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हालांकि पार्थ ने अपनी पहली गलती को सुधारते हुए दूसरी बार में भाषण ठीक से पढ़ा, वहीं उनके भाषण की आलोचना करने वाले ट्रोलर्स के सवाल पर भी पार्थ ने करारा जवाब दिया. उन्होने फेसबुक पर पलटवार करते हुए लिखा कि मुझे अपने प्रदर्शन पर पूरा भरोसा है, मै बोलूंगा कम और काम ज्यादा करूंगा.

बता दें कि ऐसा पहली बार नही हुआ जब कोई नेता अपने भाषण के दौरान अटका हो या ठीक तरह से भाषण न दे पाया हो. इससे पहले भी छत्तीसगढ़ में एक नेता कवासी लखमा को लेकर भी एक ऐसी ही खबर सामने आई थी.

दरअसल हुआ यू था कि छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार में नौ मंत्रियों ने मंत्री पद की शपथ ली. छत्तीसगढ़ की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभी मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस दौरान सभी विधायकों ने हिंदी में शपथ ली, लेकिन कोंटा के विधायक कवासी लखमा अपनी शपथ तक नहीं पढ़ पाए. इसके बाद आनंदी बेन पटेल ने पूरी शपथ पढ़ी और मंत्री दौहराते रहे. बताया जाता है कि भूपेश बघेल सरकार के कवासी लखमा ऐसे मंत्री हैं, जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा.

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वहीं ऐसी ही एक घटना बीते दिनों मध्यप्रदेश से भी सामने आई थी जब कांग्रेस में कैबिनेट मंत्री इमरती रानी गंणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान अपना भाषण तक नहीं दे पाई. बाद में उन्होंने पास में खड़े जिले के कलेक्टर को बुलाया और उन्हें ही भाषण पढ़ने के लिए दे दिया. बता दें कि इमरती देवी कमलनाथ सरकार में महिला और बाल विकास कल्याण मंत्री हैं.

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