पार्टियों के बीच इस चुनावी दंगल मे आए दिन कोई न कोई मुद्दा गर्माता हुआ नजर आता है. कहीं नेताओं के बीच बयान बाजियां देखने को मिलती हैं को कहीं नेताओं के बिगड़ते हुए बोल पर चुनाव आयोग का सख्त रुख सामने आता है. इसी बीच एक और अहम मुद्दे को लेकर सियासत काफी गर्म है. और ये मुद्दा है ईवीएम में गड़बड़ी का.

कई मतदाताओं की शिकायत है कि ईवीएम में गड़बड़ी की वजह से उनका वोट गलत पार्टी को जाता है. तो भई आज हम ऐसे वोटर्स की परेशानी का इलाज लेकर आए है. और वो भी सिर्फ 2 रुपय में. मतगणना के दौरान अगर कोई वोटर मशीन में गड़बड़ी का आरोप लगाता है और कहता है कि उसने वोट जिस दल को दिया था उसका वोट उस दल को नहीं पड़ा तो वो दो रुपये जमाकर वीवीपैट को चैलेंज कर सकता है. जिसके बाद प्रशासन की ओर से मौजूद एजेंटों के सामने संबंधित बूथ की वीवीपैट का ट्रॉयल किया जाएगा और उसकी सच्चाई को सामने लाया जाएगा. लेकिन इसके लिए एक शर्त भी है.

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और वो शर्त ये है कि अगर उसका दावा झूठा निकलता है. तो वोटर को उसका खामियाजा भी भरना पड़ेगा. वीवीपैट को गलत चैलेंज करने पर वोटर के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी. यहां तक कि वोटर को जेल भी जाना पड़ सकता है. ये फैसला इलेक्शन कमीशन की ओर से चुनाव में पारदर्शिता लाने और ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाने को देखते हुए लिया गया है. और इसी के चलते इस बार एडवांस एम-3 वीवीपैट मशीनों में ये नई व्यवस्था की गई है.

क्या है वीवीपैट

जब आप EVM में किसी उम्मीदवार के सामने बटन दबाकर उसे वोट करते हैं तो VVPAT से एक पर्ची निकल आती है, जो बताती है कि आपका मत किस उम्मीदवार के हिस्से गया है. इस पर्ची पर उम्मीदवार का नाम और उसका चुनाव चिन्ह छपा होता है. आपके और VVPAT से निकली पर्ची के बीच कांच की एक दीवार लगी होगी, मतदाता के रूप में आप 7 सेकेंड तक इस पर्ची को देख पाएंगे और फिर यह सीलबंद बॉक्स में गिर जाएगी, यह आपको नहीं मिलेगी. सिर्फ पोलिंग अधिकारी ही इस VVPAT तक पहुंच सकते हैं. मतगणना के वक्त किसी भी तरह की असमंजस या डिस्प्यूट की स्थिति में इन पर्चियों की भी गणना हो सकती है.

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