देश में एक बार फिर मोदी सरकार बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर चुकि है. जनता के दिए एकतरफा बहुमत से न केवल विपक्ष, बल्कि सत्ता पक्ष भी हैरान है. राजनीतिक गलियारों में चल रही अटकलों के बीच बीजेपी की जीतने की उम्मीद तो थी लेकिन कांग्रेस को इस तरह नेस्तनाबूत करते हुए भगवा ध्वज फहराएगा, इसका अनुमान बड़े-बड़े राजनीतिक खिलाड़ियों को भी नहीं रहा होगा.

इस बार मोदी लहर नहीं सुनामी चली, जिसमें विपक्ष बह गया. बीजेपी ने अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है और  542 में से 303 सीटें जीत कर सत्ता में वापसी की. इसीके साथ अपनी दमदार जीत के बाद नरेंद्र मोदी देश के तीसरे ऐसे प्रधानमंत्री बन गए हैं जो पूरे बहुमत के साथ दूसरी बार सरकार बनाएंगे. अब यहां सवाल ये है कि अगर नरेंद्र मोदी तीसरे ऐसे पीएम हैं तो पहले दो प्रधानमंत्री कौन हैं जो पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आए थे. चलिए जानते हैं

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दरअसल देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नहरू और इंधिरा गांधी ही वो पहले दो प्रधानमंत्री है जो इससे पहले पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में दूसरी बार आए थे.

साल 1951-1952 के पहले लोकसभा चुनाव में जवाहरलाल नेहरू की अगुआई में कांग्रेस ने तीन-चौथाई सीटें जीती थीं. उन्होंने 1957 और 1962 का चुनाव भी पूर्ण बहुमत से जीता. 1951-52 के चुनावों में 489 सीटों में से कांग्रेस ने 364 सीटों पर कब्जा किया था. पार्टी को उस वक्त कुल वोटों में से 45 प्रतिशत वोट मिले थे. 1957 में एक बार फिर नेहरू मैदान में थे. और 494 सीटों में से 371 सीटें हासिल कर फिर एक बार बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की.

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वहीं अगर बात करें इंदिरा गांधी की तो 1967में हुए लोकसभा चुनाव में जवाहर लाल नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी को 520 सीट में से 282 पर जीत मिली. लोकसभा चुनावों में ये इंदिरा गांधी की पहली जीत थी. 1969 में कांग्रेस ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया, जिन्हें कांग्रेस (ओ) कहा गया. इस कांग्रेसी धड़े की अगुआई  मोरारजी देसाई ने की. यही वक्त था, जब इंदिरा गांधी ने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया, जिसका मतदाताओं पर खासा प्रभाव पड़ा.

नतीजा ये रहा कि 1971 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा की कांग्रेस ने 352 सीटें जीती.  लेकिन साल 1977 के चुनाव में पहली बार कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई. इस चुनाव में जनता पार्टी गठबंधन को 298 और कांग्रेस को 153 सीट मिलीं. जिसमें मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने. लेकिन सरकार मतभेदों के कारण चल नहीं पाई.

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