एक वोट की कीमत तुम क्या जानों वोटर बाबू ?

11 अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच लोकसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे  जिसमें आप भी अपनी पसंदीदा पार्टी को वोट जरूर डालने जाएंगे लेकिन क्या आपको पता है की आपके एक वोट की क्या कीमत हैं आपका एक वोट किसी की सरकार बना सकता हैं तो किसी की सरकार गिरा भी तो सकता है आपका एक वोट किसी को मंत्री , मुख्यमंत्री तो किसी को  प्रधानमंत्री तक बना सकता हैं…एक वोट की वजह से   अटल जी को अपनी सरकार गंवानी पड़ी थी…लेकिन क्या आपको ये पता है कि आपके एक वोट की असल वैल्यू क्या है?

अब आप सोच रहे होंगे की वोट की भी कोई कीमत होती है ? जी हां हर एक व्यक्ति के वोट की अपनी कीमत होती है… हर एक राज्य के लोगों के वोट की कीमत अलग अलग होती हैं …भारत में लोकसभा सीटों पर अलग अलग गति से जनसंख्या बढ़ीं हैं

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ये बंटवारा 1971 में जनगणना के आधार पर हुआ और फिर 1976 में लोकसभा सीटें धीरे धीरे 543 पर पहुंची और इन 5 सालों में  जनसंख्या काफी मात्रा में बढ़ती दिखी

जिसके बाद  1977 में  हर लोकसभा सीट पर औसतन 10.1 लाख नागरिकों और 5.9 लाख वोटर्स का प्रतिनिधित्व करता दिखा . लेकिन जैसे-जैसे अलग-अलग राज्यों की जनसंख्या में अलग-अलग स्तर पर बढ़ोत्तरी होती गई तो लोकसभा सीटों का यह प्रतिनिधित्व का औसत भी बिगड़ता चला गया वहीं 2019 में हर लोकसभा सीट औसतन 24.2 लाख नागरिकों और 15.6 लाख वोटर्स का प्रतिनिधित्व कर रहीं है

लेकिन इन सब के सवालों के बीच  ये भी जानना है जरुरी की किस राज्य के एक वोट की है सबसे ज्यादा कीमत और किस राज्य के वोट की है कीमत सबसे कम ?

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2014 में जनसंख्या  के हिसाब से तेलांगना के मलकाजगिरी की सबसे बड़ी लोकसभा सीट थी इस सीट पर 32 लाख से भी ज्यादा वोटर्स थे और देश के सबसे कम वोटर्स वाली लोकसभा सीट लक्षद्वीप थी. जिसमें  50 हजार वोटर्स थे जिसके मुताबिक मलकाजगिरी में लक्षद्वीप के मुकाबले करीब 64 गुना ज्यादा वोटर्स थे.  अगर देखा जाए तो  लक्षद्वीप का एक वोट मलकाजगिरी के 64 वोटों के बराबर है. यानि लक्षद्वीप के एक वोट का संसद में प्रभाव, मलकाजगिरी के साठ से भी ज्यादा वोटों के बराबर होगा.

और सबसे कम कीमत देखी जाए तो दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश की हैं जिसमें देश के औसत के मुकाबले हर सीट पर करीब 3 लाख वोटर ज्यादा हैं. इसका मतलब यह हुआ कि दिल्ली के 10 वोटर जितना प्रभावशाली हैं उतना देशभर के  मात्र 8 वोटर ही प्रभाव रखते हैं.

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