सेक्स हमेशा ही भारत में गुप्त चर्चा का विषय रहा है। पर चौंकाने वाली बात ये है, यहीं पर वात्सायन ने कामसूत्र लिखी थी और खजुराहो के मंदिरों की दीवारों पर नग्न कामक्रिया में लिप्त मुर्तियों को उकेरा गया है। ये विरोधाभास ही इस विषय पर और चर्चा के लिए लोगों को उकसाता है। इस विषय में जानने की उनकी जिज्ञासा लालसा में तब्दील होती जाती है।

खजुराहो मंदिर पर उकेरी कामक्रिया में लिप्त मूर्तियां

अंग्रेजी का एक शब्द है, फैंटेसी यानी किसी के बारे में कल्पना करके उसके बारे में मन में कामुक विचार लाना। आप किसी को देखकर तरह तरह की फैंटेसी में खो जाते हैं। भारतीय समाज में ये अधिकार सिर्फ पुरुषों को हैं। महिलाओं की क्या चाहत है और सेक्स को लेकर उनकी क्या सोच है इसके जिक्र की तो छोड़ ही दीजिए वो सोच भी नहीं सकती है। इसीलिए सामान्य-सी सेक्स से जुड़ी भावनाओं को लेकर बात करने में भी उन्हें शर्म महसूस होती है। लेकिन हैं तो वे भी इंसान ही, उनकी भी इच्छाएँ हैं, उनका भी मन होता है। महिलाएं भी फैंटेसी कर सकती हैं। उनकी भी सेक्स के बारे में कल्पनाएं हो सकती हैं। इसपर कभी किसी का ध्यान नहीं गया, लेकिन जब इस पर एक फिल्म बनी तो बवाल हो गया।

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‘लिपिस्टिक अंडर माय बुर्का’ नाम से विवाद झलकने लगता है, कहते हैं इसे देखने के बाद तो सेंसर बोर्ड वाले कुर्सियों से उछल पड़े थे। प्रकाश झा के बैनर तले बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में दर्जनों अवॉर्ड जीते, लेकिन भारत में ये फिल्म पिछले 6 महीनों से रिलीज के संघर्ष कर रही थी। हालांकि अब इस फिल्म का रास्ता साफ हो गया है और एकता कपूर इस फिल्म को रिलीज़ कर रही है, जिसका मुंबई में ट्रेलर लॉन्च किया गया।

‘लिपिस्टिक अंडर माय बुर्का’जैसे की नाम में ही झलकता है, ये फिल्म महिलाओं से जुड़ी एक बहुत बड़ी समस्या पर केंद्रित है। लेकिन मज़ेदार है इस फिल्म से जुड़ा ये पोस्टर। अमूमन बीची की उंगली को कोई इस तरह उठा दे, तो इसे भद्दा और अश्लील समझा जाता है। क्रिकेट के मैदान में इस तरह की उंगलियां उठती रही हैं और उसपर बवाल भी हुआ है। अब सवाल ये खड़ा हुआ, कि एकता कपूर ने ये उंगली सेंसर बोर्ड के लिए उठाई है, जिसने इस फिल्म को रोके रखा।

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इसके जवाब में एकता बताती है-

“फिल्म के पोस्टर में दिखाई गई ये उंगली या लिपस्टिक हम उस समाज को दिखा रहे हैं, जो हमें बाहर नहीं आने दे रहा है। ये उंगली उन लोगों को दिखाई जा रही है जो हम औरतों की चाहतों को अंदर ही दबाए रहने के लिए मजबूर कर रहे हैं। ये फिल्म पुरुषों के खिलाफ नहीं बल्कि महिलाओं की आइडियोलॉजी पर आधारित है।

एकता लड़कियों की समस्या को आगे बताती हुई कहती हैं-

“आप किसी भी औरत या लड़की से मिल लीजिए, आपको पता चल जाएगा कि एक दिन में उसके साथ पांच ऐसी स्थितियां सामने आती हैं, जब उसे औरत होने की वजह से खुद को साबित करना पड़ता है। कभी किसी औरत को पुरुष प्रधान काम करने की जगह पर तो कभी कहीं और। उसे बार-बार खुद को साबित ही करना पड़ता है”

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एकता कपूर इस फिल्म के प्रमोशन के दौरान एक कैंपेन भी शुरू करने वाली हैं, जिसका नाम होगा ‘लिपिस्टिक फॉर मेन’। तो तैयार हो जाइए ‘लिपिस्टिक फॉर मेन’ के लिए, और साथ में लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का के लिए भी। ताकी आप भी जान सके कि महिलाएं भी फैंटेसी करती हैं और उनकी फैंटेसी आपसे बिलकुल जुदा होता है।