आज के फैशनेबल वक्त में सभी ट्रेंडिंग लुक अपनाना चाहते हैं, जिसके लिए नए-नए उपरकणों का यूज़ करते हैं। सभी को लगता है, ये उपकरण और स्टाइल्स नए जमाने के हैं। लेकिन इनके पीछे की सच्चाई और शुरुआत के बारे में शायद ही कोई जानता हो, कि आखिर ये स्टाइल आए कहां से ? और ट्रेंडिंग लुक देने वाले उपकरण की खोज किसने की? तो आज हम आपको बताएंगे, कि बालों को स्ट्रेट करने के लिए जिन स्ट्रेटनर का यूज़ करते हैं, वो कितना पुराना तरीका है और इसकी इजाद किन लोगों को बालों को ठीक करने के लिए की गई थी।

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लड़कियों के बालों के लिए सबसे बेस्ट हेयर लुक होता है स्ट्रेट। अपने बालों को लड़कियां घर बैठे असानी से हेयर स्ट्रेटनर की मदद से स्ट्रेट कर लेती हैं। लेकिन क्या आप ये जानते हैं, कि ये हेयर स्ट्रेटनर कितना पुराना है? इसकी शुरुआत आज के वक्त में नहीं बल्कि 1872 में की गई थी। सुनकर आप चौंक गए होंगे, कि नई पीढ़ी के उपकरणों का यूज़ पुराने वक्त में भी होता था। जी हां यही सच है, इसकी शुरुआत मार्सल ग्रेट्यू नाम के एक पारसी शख्स ने की थी।

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आपको बात दें, कि पुराने ज़माने में मार्सल अलग-अलग तरह की रॉड्स और गर्म होने वाली कंघियों का इस्तेमाल किया करता था, जो बिलकुल हेयर स्ट्रेटनर का काम किया करते थे। जिससे बाल बिलकुल स्ट्रेट हो जाया करते थे। इसके बाद 1880 में हेयर स्ट्रेटनिंग कॉंब्स का प्रचार तेज़ी से होने लगा। इन्हें पहले हेयर आइरन के नाम से जाना जाता था, इतना ही नहीं, मार्सल ने हेयर स्ट्रेटनिंग की शुरुआत वैश्याओं के बालों को संवारने के साथ की थी, जो छोटी-छोटी झोपड़ियों में रहती थीं।

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सन 1872 में लंबे बालों पर वेव्स बनाने का स्टाइल बेहद पॉपूलर था। इसी स्टाइल को बनाने के लिए मार्सल ने गर्म आयरल रॉड का इस्तेमाल किया। जिन्हें मार्सल के बनाए हुए टोग्स गैस बर्नर पर काफी देर गर्म किया जाता था, लेकिन उन्हें केवल प्रोफेश्नल्स ही यूज किया करते थे। इसके बाद स्ट्रेटर काफी प्रचलन में आया और मार्सल को हाई प्रोफाइल क्लाइंट्स मिलने लगे। इसके साथ ही भारी संख्या में महिलाएं और लड़कियां बालों के इन नए स्टाइल्स को अपनाने लगी। बता दें कि अब मार्सल के नाम से मशहूर हेयर स्टाइलिंग टेकनिक्स बनाई जाती हैं।