अभी तक तो पूरा देश नोटबंदी की मार से उभर नहीं पाया. जिस दौरान लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. कैश निकालने के लिए बैक और एटीएम में लोगों को लंबी –लंबी लाइनों में लगना पड़ा था और लाइनों में लगकर कुछ लोग बेहोश भी हो गए थे. जिसके चलते कई लोगों के काम तक ठप हो गए. तो वहीं कैश की किल्लत के चलते कई शादीयां भी टूट गई.

कभी पता चलता था कि रात को 4 बजे बैंक में कैश आने वाला है तो लोग 4 बजे से ही लाइन में खड़ा हो जाते थे फिर पता चलता था कि कैश खत्म हो गया और लोगों को दुखी मन से वापस घर लौटना प़ड़ता था. लेकिन अब एक बार फिर आपको ऐसा ही दिन देखना पड़ सकता है. जी हां कुछ दिनों बाद आपको नोटबंदी के दौरान जैसी एटीएम और बैंकों पर लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिल सकती हैं.

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दरअसल अगले चार महीने में यानी मार्च 2019 तक देशभर में करीब आधे से ज्यादा एटीएम बंद हो सकते हैं. एटीएम उद्योग के संगठन कन्फैडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री के मुताबिक देश में एटीएम सेवा देने वाली कंपनियों को मार्च 2019 तक करीब 1 लाख 13 हजार एटीएम बंद करने पड़ सकते हैं.

ऐसा हुआ तो देश में फिर नोटबंदी जैसा माहौल बन सकता है. एटीएम के बाहर लंबी-लंबी कतारें और बेचैनी देखने को मिल सकती है. बता दें कि फिलहाल 2 लाख 28 हजार एटीएम काम कर रहे हैं. इनमें 1 लाख 13 हजार एटीएम में एक लाख ऑफ साइट एटीएम शामिल हैं. इसके अलावा 15,000 व्हाइट लेबल एटीएम हैं. लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद एटीएम के संचालन का काम व्यावहारिक नहीं रह गया है.

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और ऐसा हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड और नकदी प्रबंधन योजनाओं के हालिया मानकों के चलते हो सकता है. जिसके चलते एटीएम कंपनियां इनकी संख्या धीरे-धीरे कम कर रही हैं. फिलहाल छोटे शहरों में एटीएम बंद किए जा रहे हैं.

बता दें कि आधे से ज्यादा एटीएम बंद होने से भारी बेरोजगारी भी आएगी, जो पूरी अर्थव्यवस्था में वित्तीय सेवाओं के लिए हानिकारक भी होगी. संगठन के मुताबिक नई तकनीक के हिसाब से एटीएम में बदलाव के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. इन मशीनों के कैश लॉजिस्टिक और कैसेट स्वैप मेथड में बदलाव करने पर ही 3,500 करोड़ का खर्च आ सकता है. अगर बैंक इस खर्च का बोझ नहीं उठाते हैं तो एटीएम सर्विस देने वाली कंपनियां इन्हें बंद करने का फैसला कर सकती हैं.

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अब देखना ये होगा कि क्या बैंक एटीएम सर्विस देने वाली कंपनियां पर पढ़ने वाले वित्तीय बोझ को उठाने के लिए सामने आती हैं या नहीं.

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