भारत में चुनाव और सरकार बनने और बनाने के लिए कितने दांव-पेंच होते हैं, ये किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। चुनावी साल में सियासी पार्टियों के लिए युद्ध जैसा माहौल होता है और उन्हें एक योद्धा की तरह हर तरह की सियासी पैंतरेबाज़ी से लड़ना-भिड़ना होता है। लेकिन क्या आपको ये पता है, कि बिहार का एक नौजवान जो रुस में डॉक्टरी की पढ़ाई करने गया था, वो वहां कुर्स्क नाम के रुसी प्रांत का डेप्यूतात बन चूका है। आपको बता दें, कि रुसी भाषा में विधायक या एमएलए को डेप्यूतात कहते है।

जी हाँ, बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले अभय कुमार सिंह आज रूस की सत्ता में शामिल हो गए हैं। व्लादीमिर पुतिन की “यूनाइटेड रशा” नामक पार्टी से अभय सिंह ने चुनाव जीता है। अभय सिंह का राजनीति में आने का कभी से कोई इरादा नहीं था, लेकिन वो राष्ट्रपति पुतिन से बहुत ही प्रभावित थे और उन्हीं से प्रेरित होकर राजनीति में उन्होंने एंट्री की और किस्मत का करिश्मा देखिए, वो रुसी प्रांत में चुनाव भी जीत गए। आपको बता दें की व्लदीमिर पुतिन और उनकी पार्टी “यूनाइटेड रशा” पिछले 18 सालों से रूस की सत्ता में हैं।

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Mr. Singh with Conciliators

अभय सिंह बताते हैं, कि शुरुआती दिनों में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। मेहनत से डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वे भारत लौटे, तो उन्होंने कभी ये नहीं सोचा था कि वे रूस के राजनीति का हिस्सा बनेंगे। यहाँ तक की उन्होंने भारत वापस आकर प्रैक्टिस करने का रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया था, लेकिन फिर अभय सिंह वापस रूस आ गए और अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर दवा का बिज़नेस शुरू किया। गोरा न होने के कारण उन्हें दिक्कतें भी हुई लेकिन कुछ करने का जूनून उन्हें जमे रहने और मेहनत करने का साहस देता रहा। फिर क्या था पैर जमते गए और अभय सिंह नई ऊचाईयों को छूते चले गए। पहले फार्मा, फिर रियल स्टेट और अब डेप्यूतात।  अभय सिंह के पास रूस में अभी कुछ शॉपिंग मॉल्स भी हैं।

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Abhay kr. Singh with his Colleague

ऐसा नहीं है, कि कामयाबी की इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अभय अपने बिहार को भूल चुके हो। उन्हें आज भी बिहार की याद आती है और वे बिहार आना भी चाहते हैं, क्योंकि उनके सभी सगे-सम्बन्धी, दोस्त-साथी वहीं तो रहते हैं।

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