वेश्या थोड़ा सभ्य शब्द है, लेकिन जब लोग उसी को रंडी कहकर पुकारते हैं, तो आपका देखने का नज़रिया और नज़र दोनों बदल जाती है। पेशा तो वही है, लेकिन फर्क शब्द का है। वैसे वेश्या को सबका पुरुषों को बिगाड़ने वाली, लोगों का घर बर्बाद करने वाली इन्हें संबोधनों से पुकारा जाता है, लेकिन क्या वेश्याए लोगों को घर बसा भी सकती हैं ? लोगों को ये बेहूदा बात लगेगी, लेकिन एक वेश्या ऐसी हैं, जिसने पूरे 5000 घरों को टूटने से बचाया है।

बेगम जान के किरदार में विद्या बालम

हाल ही में बॉलीवुड की एक फिल्म ‘बेगम जान’ जान आई है, ये फिल्म भी पूरी वेश्या की जिंदगी के इर्द-गिर्द ही घूमती है। इस फिल्म में वैश्या के किरदार निभा रही विद्या बालन के लिए ये पेशा शर्म नहीं बल्कि गर्व का काम है, जिसे वो गंदा काम नहीं समझती है।  दुनिया में औरतों के इस पेशें को हिकारत की नजर से देखा जाता है। उनके मुहल्ले, कॉलोनियां यहां तक की शहर भी अलग से बसाए जाते हैं। एक तरह से उन्हें समाज से बाहर कर दिया है जाता है। लेकिन ‘बेगम जान’ ने इस फिल्म में बताया था, कि वेश्यालय उनके लिए घर जैसा होता है, जहां आया हुआ मर्द उनका कस्टमर होता है, जिसकी वे इज़्जत करते हैं। जो काम उनकी बीवियां नहीं कर पाती उनके लिए वो एक वेश्या करती है। दुनिया भले ही इस काम को गंदा कहती हो, लेकिन वो वेश्या ही है, जो दर्द सहकर दूसरे मर्दो को खुश बांटती है, उन्हें खुश करती है।

सेक्स वर्कर मैडम ‘विवयन वॉल्डेन’

ये कहानी भले ही फिल्मी हो, बातें किताबी हो लेकिन असल जिंदगी में भी ये लागू होती है। दुनिया में एक ‘बेगम जान’ और मौजूद हैं, जो रियल लाइफ में वो कर रही है, जो फिल्म में बेगम जान डायलॉग्स में बोला है। ऊपर तस्वीर में दिख रही महिला 68 साल की मैडम ‘विवियन वॉल्डेन’ हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी सेक्स इंडस्ट्री में बिता दी है। वैसे कहा ये जाता है, महिला के वेश्या बनने के पीछे कोई न कोई मजबूरी ज़रूर होती है। फिल्म में बेगम जान की भी होती है। लेकिन ‘मैडम’ की असल जिन्दगी में सेक्स की दुनिया में जाने के पीछे कोई बुरी यादें नहीं थीं और न ही कोई मजबूरी थी। बल्कि मैडम विवियन ने खुद की मर्जी से इस बदनाम पेशे को चुना। मैडम बताती हैं, कि उन्होंने 17 साल की उम्र में अच्छी-खासी नौकरी छोड़ कर स्ट्रीप-क्लब जॉइन कर लिया था, पहले उन्होंने स्ट्रीपल का काम किया और फिर वैश्या का काम शरु कर दिया। इस काम में उनका मजा आता था। विवियन कहती हैं-

‘वेश्या की तरह काम करना मुझे एक तरह की ताकत से भर देता था, क्योंकि ये काम ऐसा है, कि आप क्लाइंट को संतुष्ट कर देते हैं, संतुष्टि पाकर क्लाइंट आपकी इज्ज़त करता है, पूजता है आपको और पैसे देकर वो निकल सकता है। उसे वापस नहीं आना पडता, कोई जिम्मेदारी नहीं निभानी पड़ती’

मां चाहती ती बेटी एक्ट्रेस बने, विवियन ने चुना वेश्या का रास्ता..

विवियन वॉल्डेन यहूदी परिवार में पैदा हुई थी, वो 9 से 5 बजे की नौकरी करती थीं। विवियन की मां चहती थी, कि वो एक्ट्रेस बने, लेकिन विवयन को कुछ और ही पंसद था। एक दिन जब वो अपने ऑफिस के लन्च ब्रेक में स्ट्रीप क्लब गई और वहां उन्होंने स्ट्रीपर्स को देखा। यही पल था जब उनके मन में भी ये काम करने की इच्छा पैदा हुई। उन्हें कपड़े उतारकर नाचने में ग्लैमर नज़र आया। विवियन स्ट्रीपर्स का काम करना चाहती थीं, उन्होंने तुरंत ही मैनेजर से बात की और उनकी नौकरी पक्की हो गई। अपने काम को करने में विवियन को बेहद मज़ा आता था। इसके बाद उन्होंने कुछ ही सालों बाद वेश्यावृत्ति का साइड बिजनेस शुरु किया। विवियन ने अंग्रेजी अखबार डेली मेल से बात-चीत करते हुए कहा-

‘जो मौका मुझे वेश्यावृत्ति ने दिया, वो कोई और काम दे ही नहीं सकता था। इन क्लब्स में वेश्यावृत्ति करने के लिए अलग तरह का टैलेंट चाहिए, आपको तबतक इंतजार करना पड़ता है जबतक दूसरा शराब के नशे में धुत न हो जाए, एक बार वो नशे में हो, आप उनके पास जाकर अपनी सेंटिग कर सकते हैं, ये आपका प्राइवेट बिजनेस होता है’  

जब विवियन स्ट्रीप-क्लब में काम किया करती थीं, तो वहां उनकी मुलाकात बिली से हुई जो प्रोफेशनल बोलर थे। जो विवियन से बेहद प्यार करते थे, इसके बाद बीली ने विवियन के लिए खुद नए क्लब खोलकर दिए, जिसने विवयन से कहा था, कि अगर तुम वेश्या होती तो, दुनिया की सबसे अच्छी वेश्या होती। विवियन ने 1995 में पहला कोठा खोला था, यानी 22 साल पहले जिसकी मालकिन विवियन थी। उनका ये कोठा सबसे ज्यादा पॉपूलर था, उसके पीछे दो वजहें थीं, पहली ये, कि उस वक्त मेच्यौर लड़कियों को कोई भी कोठा पनाह नहीं देता था, लेकिन मैडम विवियन अपने कोठे पर बड़ी उम्र की वेश्याओं को नौकरी दे देती थी। विवियन ने अपने कोठे पर 18 से 40 साल तक की लड़कियों को नौकरी दी। विवियन के कोठे में दूर-दूर देश की लड़कियां आती थीं।

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मैडम का कोठा अव्वल होने की दूसरी वजह ये थी, कि यहां कस्मटर मैडम को पैसे नहीं देते थे, बल्कि सीधे वेश्याओं को दिया करते थे। इससे वेश्या अपनी मेहनत का पूरा पैसा लिया करती थी और मैडम वेश्याओं से सिर्फ एक तय किराया ही लेती थी। विवियन बताती है-

‘मेरे कोठे में हर तरह के मर्द आते थे, वर्जिन और शादीशुदा दोनों। बहुत से जाने-माने, फेमस लोग भी आते थे, मगर उन्हें कभी असुरक्षित महसूस नहीं हुआ। उन्हें मालूम था, कि उनका राज़ यहां सुरक्षित है, कि मैं उनकी कहानी अखबारों को नहीं बेचूंगी’

लेकिन एक दिन सब बर्बाद हो गया…

तकरीबन 8 साल पहले विवियन का बिजनेस बंद हो गया। उनका करियर वहीं खत्म हो गया, जब कोठों पर छापा पड़ा और उन्हें जेल जाना पड़ा। कोर्ट में विवियन ने अपना गुनाह कबूल किया और उन्हें 6 महीने की सजा हुई। कुछ समय तक विवियन को खाली बैठना पड़ा और कई घंटों सर्विस करनी पड़ी। जिसके बाद विवियन ने तय किया, कि अब वो कोठा नहीं चलाएंगी। अब विवियन वेश्यावृत्ति को लीगल करने की मांग कर रही है। क्योंकि उनके लिए वेश्यावृत्ति सुंदर पेशा है और उनकी मांग है, कि इसे बढ़ावा मिलना चाहिए-

‘वेश्यावृत्ति ज़रुरी है मैने कई संस्कारी परिवार बचाए हैं, 5000 शादियां टूटने से बचाई हैं। क्योंकि हमारे कोठे पर वो लोग भी आते थे, जो शारीरिक रुप से पोटेंट नहीं होते थे। उनकी पत्नियां उनकी सेवा तो कर लेती थी, पर सेक्स नहीं दे पाती थी, हम उन्हें भी भरपूर सुख देते थे’

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