बोफोर्स घोटाले का जब भी जिक्र आता है, गांधी परिवार की ओर शक की निगाहें खुद ब खुद चली जाती हैं, क्योंकि इस घोटाले की आंच तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के गिरेबां तक पहुंच गई थी। हालांकि इस मामले में गांधी परिवार को क्लीन चिट दे दी गई। लेकिन अब 1986 में हुए इस तोप घोटाले के वजह से एक बार फिर गांधी परिवार मुश्किल में पड़ सकता है। दरअसल इस मामले में याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल ने CBI से दोबारा नए सिरे से केस की जांच शुरू करने की मांग कर दी है।

अजय अग्रवाल याचिकाकर्ता

अजय अग्रवाल ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को 8 पन्नों का एक पत्र लिखकर इस केस की जल्द से जल्द से जांच पूरी करने और पुरानी फाइलों को खोलने की अपील की है। दरअसल हाल ही में संसदीय लोक लेखा समिति ने बैठक के दौरान रक्षा मंत्रालय को बोफोर्स सौदे की गुम फाइलों को खोजने का निर्देश दिया था लेकिन रक्षा मंत्रालय ने पीएसी को आधी-अधूरी रिपोर्ट ही मुहैया कराई, जिसपर पीएसी मंत्रालय पर नाराज हो गई थी।

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रक्षा मंत्रालय

इसी से सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहे अजय अग्रवाल को भी संजीवनी मिल गई और उन्होंने सीबीआई को पत्र लिख दिया। इस पत्र में अजय ने आरोप लगाए हैं, कि यूपीए सरकार में सोनिया ने सीबीआई पर दबाव डलवाकर मामले में लीपापोती कराई है, लिहाजा अब सीबीआई दोबारा फाइलें खोलकर केस से जुड़े सभी दोषियों पर एक्शन लें।

सीबीआई चीफ आलोक वर्मा

अग्रवाल के मुताबिक सेना का अधिकारियों ने जब फ्रैंच गन कंपनी सोफमा की तोपें खरीदने को हरी झंडी दी, तो बोफोर्स कंपनी से सौदा क्यों किया गया? सोफमा की गन्स की रेंज 29 किमी थी तो फिर 21 किमी रेंज की बोफोर्स तोप क्यों खरीदी गई? सोफमा की तोप बोफोर्स से कम दर पर भी मिल रही थी, फिर भी बोफोर्स को क्यों खरीदा गया? सोफमा कंपनी भारत को तकनीक देने के साथ ही यहां फैक्ट्री लगाने को तैयार था फिर भी बोफोर्स से तोपें क्यों खरीदी गईं? सोफमा तोप के साथ बारूद भी दे रहा था, जबकि बोफोर्स सिर्फ तोप फिर भी बोफोर्स से सौदा क्यों किया गया? इन सवालों के साथ अजय अग्रवाल ने सीबीआई से गुजारिश की है, कि देशहित में इस केस को जल्द निपटाया जाए, ताकि असली दोषियों को सजा दी जा सकें।

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बोफोर्स तोप

दरअसल इस केस में गांधी परिवार पर आरोप है, कि सोनिया गांधी के इटालियन दोस्त क्वात्रोची के जरिए स्वीडन की कंपनी बोफोर्स से ये तोपे खरीदी गई और इसमें दलाली के रूप में गांधी परिवार को मोटा पैसा मिला। इंडिया संवाद की रिपोर्ट के मुताबिक अजय अग्रवाल ने ये तक कहा, कि सीबीआई की जांच में घूसखोरी की बात सामने आऩे के बाद 2003 क्वात्रोची के लंदन के दो खाते भी फ्रीज करा दिए थे, जिन्हें 11-12 जनवरी की आधी रात को तत्कालीन यूपीए सरकार ने डिफ्रीज करा दिया था। हालांकि इस मामले को अजय अग्रवाल सुप्रीम कोर्ट लेकर गए थे, कोर्ट ने 16 जनवरी को फैसला सुनाकर इन खातों को यथास्थीति रखने का आदेश दिया था, लेकिन खाते डिफ्रीज होते ही दलाल क्वात्रोची रिश्वत के 42 करोड़ ठिकाने लगा चुका था। अग्रवाल ने इन खातों की जांच की भी मांग की है, कि ये पैसा आखिर गया कहां? और किसे दिया गया ?

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क्वात्रोची और राजीव गांधी

आपको बता दें, कि इस केस में लिए गए थे। हालांकि 2013 में क्वात्रोची की मौत हो गई लेकिन बोफोर्स का केस अभी तक नहीं सुलझ पाया है। हालांकि अभी अजय अग्रवाल ने इस केस से सारे सबूत दोबारा सीबीआई को देने की बात कही है। और अगर अब सीबीआई फिर से ये केस खोलती है, तो इसकी आंच सोनिया गांधी के दामन तक पहुंचनी तय है। क्योंकि अजय अग्रवाल के मुताबिक उनके पास घोटाले में राजीव गांधी, क्वात्रोची, विन चड्ढा और हिंदुजा ब्रदर्स और सेना के सीनियर अफसरों की मिलीभगत के कई सबूत मौजूद हैं। यहां तक कि अमेरिकी एजेंसी सीआईए की 1988 की रिपोर्ट भी ये कहती है, कि बोफोर्स सौदेबाजी में घूस का पैसा दलाल के मार्फत भारत सरकार के जिम्मेदारों तक पहुंचा था।

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