रात को अगर अकेली लड़की सड़क पर निकलने की हिम्मत कर ले, तो उसके साथ क्या होता है, ये हरियाणा में सारी दुनिया ने देखा। लड़कियां रात में अकेली क्या ग्रुप में भी निकल नहीं सकती। देश में रेप की बढ़ती वारदातें और लड़कियों की सुरक्षा का मुद्दा हर सरकार में उठता रहा है। इस मुद्दे पर सरकारें तो बदली, लेकिन हालात नहीं बदले। आज भी लड़कियां महफूज नहीं हैं। लेकिन लड़कियां भी रातों में सड़क पर निकलना चाहती हैं, वो भी महसूस करना चाहती हैं, कि रात की खूबसूरती क्या होती है। रात में सुनसान सड़कें कैसी होती हैं, और इसी लिए बनारस में लड़कियां आधी रात को सड़क पर निकल पड़ी और कहने लगी “मेरी रातें, मेरी सड़क” ।

जरुर पढ़ें:  योगी जी का शगुन- नए जोड़ों को 'तोहफे' में देंगे कंडोम और किट
मेरी रातें, मेरी सड़क कैंपेन 

बनारस की सड़कों का नज़ारा कुछ यूं ही था, हर ओर लड़कियां ही लड़कियां दिख रही थीं और उऩके हाथ में थीं वो तख्तियां जो उनके अधिकारी की आवाज़ बुलंद कर रही थी। बीएचयू लंका से शुरू हुआ ये महिलाओं का मार्च अस्सी घाट पर रात साढ़े बारह बजे जाकर खत्म हुआ और यहां समय बिताकर उन्होंने ये मांग की, कि जैसे लड़के यहां आधी रात को महफूज बैठे हैं ऐसे ही लड़कियों को भी बैठने का अधिकार मिलना चाहिए।

लंका से शुरू हुआ लड़कियों का मोर्चा

दरअसल हरियाणा में वर्णिका कुंडू के साथ हुए साथ हुए हादसे के बाद फेसबुक पर मेरी रातें, मेरी सड़क नाम से कैंपेन चलाया जा रहा है। उसी के तहत देश भर के महिलाएं रात को सड़क पर उतरीं और उन्होंने उस पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती दी, जो लड़कों के रात में बाहर रहने पर खुश होती है और लड़कियों के रात में बाहर रहने को गलत निगाह से देखते हैं। ये कैंपेन में शामिल महिलाओं ने कहा ये समाज महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है, लेकिन उन्होंने सड़क पर निकलकर ये बता दिया है, रात और सड़क उनकी भी उतनी ही है, जितनी पुरुषों की। हालांकि लंका से निकले इस महिल मार्च में पुरुष भी उनके साथ थे और महिलाओँ और लड़कियों का साथ दे रहे थे।

Loading...