मेट्रो के आने के बाद लोगों की जिन्दगी कितनी बदली है, ये तो हर वो इंसान समझ ही सकता है, जो हर रोज मेट्रो से सफर करता हो। जहां पहले वो बसों में धक्के खाते फिरता था, वही अब मेट्रो से चंद मिनटों में अपनी मंजिल पर पंहुच जाता है। जहां मेट्रो ने आपकी जिंदगी को आसान बना दिया है, तो ये काफी मददगार भी साबित हो रही है। लेकिन मेट्रो न सिर्फ आपके लिए सुवाधाजनक और फायदेमंद है बल्कि ये अपने यात्रियों के लिए वफादार भी है। जीहां बेंगलुरु की नम्मा मेट्रो के बारे में ऐसी खबर आ रही है, जिसे सुनकर आप कहेंगे, कि इंसान भले ही धोखा दे जाए, लेकिन मशीनें धोखा नहीं देती, वे अपना काम और साथ पूरा देती है, बस ऐसा ही कुछ नम्मा मेट्रो ने कर दिया, जो अपने 20 यात्रियों को लेने के लिए वापस स्टेशन पर जा पहुंची।

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Demo Pic- Metro

हाल फिलहाल जापा की मेट्रो का किस्सा खूब चर्चा में आया था, जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। बस अब समझ लीजिए की एक किस्सा जापान का है तो दूसरा किस्सा बेंगलुरु का। बात 2016 की थी, जब जापान के होकाइदो में रेल लाइन पर एक स्टेशन होता था, जिसका नाम कामी-शिराटाकी था। इस इलाके में ट्रेनों का संचालन करने वाले होकाइदो रेलवे कंपनी (एचआरसी) इस स्टेशन को बंद करना चाहती थी, लेकिन कर नहीं पाई, जिसकी वजह थी एक हाईस्कूल में पढ़ने वाली एक बच्ची, जो इसी स्टेशन से रोज अपने स्कूल जाया करती थी। आप ये सुनकर हैरान रह जाएंगे, कि एचआईसी ने सिर्फ उसी बच्ची के लिए ट्रेन चलाई, ताकि वो बच्ची रोज उसी ट्रेन से स्कूल जा सके। लेकिन दो महीने बाद जब उसकी पढ़ाई पूरी हो गई, तो मार्च 2016 में फिर ट्रेन और कामी शिराटाकी स्टेशन को बंद कर दिया गया। ये खबर सुनने वाले ने तब यही कहा था, कि..’अपने यात्रियो का तो ऐसा ध्यान सिर्फ जापान ही रख सकता है’

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girl standing on japan station

लेकिन अब बेंगलुरु की घटना ने इस बात को खारिज कर दिया है, क्योंकि सिर्फ जापान ही अपने यात्रियों के लिए ऐसा कमाल नहीं कर सकता है, बल्कि कर्नाटक की राजधानी की नम्मा मेट्रो ने भी कर दिया है। जी हां, मंगलवार की रात करीब 11-11.30 की बात है, केम्पेगौड़ा स्टेशन से नागसंद्र की तरफ जाने वाली ग्रीन लाइन की आखिरी मेट्रो तीन नंबर प्लेटफॉर्म छोड़ कर मंत्री मॉल स्टेशन तक पहुंच चुकी थी, कि तभी मेट्रो को केम्पेगौड़ा स्टेशन वापस बुला लिया गया, क्योंकि रात की आखिरी मेट्रो से नियमित यात्रा करने वाले करीब 20 यात्री वही रह गए थे।

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Namma Metro

बीएमआरसीएल (बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड) के अधिकारी ने बताया कि बीएमआरसीएल का ये नियम है, कि रात की आखिरी मेट्रो नियमित रुप से शेयऱ करने वाले अपने किसी भी यात्री को किसी भी हाल में छोड़कर नहीं जाएगी, यानी Leave no passenger behind policy. हर स्टेशन से आगे तभी बढ़ेगी जब स्टेशन नियंत्रक उसे रवाना होने की इजाज़त दे देंगे, लेकिन ग्रीन लाइन की उस मेट्रो के ड्राइवर ने गलती की थी, इसलिए उसे वापस अपने 20 यात्रियों लेने आना ही पड़ा। यानी अब कह सकते हैं, कि जापान की तरह बेंगलूरु की नम्मा मेट्रो ने भी यात्रियों को बीच सफर में अकेला नहीं छोड़ा।

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