राजनीति में भक्ति और चापलूसी किस हद तक पहुँच सकती है इसका अनुमान आप एक तस्वीर को देखकर लगा सकते है. एक कार्यकर्ता नेता जी के सहारे अपनी नैय्या पार लगाने के लिए सारी हदें पार कर देता है. दरअसल यह तस्वीर गोंडा जिले के कलाली गांव की है जहाँ बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे एक पुल का उद्घाटन करने पहुंचे.

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे गोंडा में एक पुल का उद्घाटन करते हुए

सांसद जी ने वहां जाकर भाषण दिया फिर क्या था भाषण ख़त्म होते ही एक कार्यकर्ता नेता जी का स्वागत करने के लिए मंच पर थाली लेकर पहुँचा और सांसद जी के पैर धोने लगा. चापलूसी की हद तो तब पार हो गई जब कार्यकर्ता ने सांसद महोदय के पैर धोने वाले गंदे पानी को हाथ में लेकर चरणामृत की तरह पी लिया और पंडाल में बैठे लोग इस नज़ारे को देखकर ताली बजाने लगे.

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कार्यकर्ता सांसद के पैर का पानी पीते हुए

जरा आप खुद सोचिए जिस पानी को देखकर उल्टी आ जायेगी और उस पानी को कार्यकर्ता को पिलाकर सांसद महोदय गदागद हो गये. यही नहीं बल्कि सांसद महोदय कार्यकर्ता के इस चापलूसी भरे काम देखकर फुले नहीं समाये और बेहद खुश होकर खुद उन्होंने इस तस्वीर को अपने फेसबुक पेज पर अपलोड कर दिया. ये तस्वीर बुरी तरह ट्रोल भी हुई. लिहाजा, फौरन ही उन्होंने इस तस्वीर को अपने फेसबुक पेज से हटा लिया।

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे

इस तस्वीर के सामने आने के बाद सांसद निशिकांत को लेकर तमाम तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है. लेकिन सांसद महोदय सफाई देने में पीछे नहीं हटे तुरंत महोदय ने भगवान कृष्ण को याद करते हुए फेसबुक पर एक पोस्ट किया और लिखा. “अपनो में श्रेष्ठता बांटी नही जाती और कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है तो क्या गजब हुआ? पैर धोना तो झारखंड में अतिथि के लिए होता ही है. सारे कार्यक्रम में आदिवासी महिलाएँ क्या यह नहीं करती हैं. इसे राजनितिक रंग क्यूं घसा जा रहा है. सांसद महोदय ने लिखा पैर अतिथि का धोना गलत है, अपने पुरखो से पुछीये महाभारत में कृष्ण जी ने क्या पैर नहीं धोया था? घटिया मानसिकता परलानत है.”

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बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का फेसबुक पोस्ट

लेकिन सांसद जी की इस घटिया सोच पर लोग अपनी राय देने पर रुके नहीं लोगों ने लिखा सांसद महोदय पैर धो कर सम्मान देना सराहनीय है क्योंकि यह पारंपरिक प्रथा है पर उस पानी को पीना कतई उचित नहीं है आपको उसे रोकना आपका फर्ज बनता था। जरा आप खुद सोचिए उनकी पार्टी के प्रधानमंत्री मोदी तो पैर छूने के लिए मना करते है लेकिन सांसदमहोदय ने तो कतई हद ही पार कर दी क्या सांसद महोदय की ऐसी मानसिकता लोकतंत्र को नीचा नहीं दिखाती.

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