”ज़िन्दगी हसीन है ज़िन्दगी से प्यार करो, है रात तो सुबह का इंतजार करो

वो पल आएगा जिसका इंतजार है, रब पर भरोसा और वक्त का इंतजार करो”

आज के दौर में लोग जल्दी हार मान जाते हैं और ज़िन्दगी से दूर भागने लगते हैं। ये तो सब जानते हैं कि ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा। तो फिर क्यों ये लोग ज़िन्दगी से प्यार नहीं करते? सांसों की कीमत क्या होती है, जिंदगी किसे कहते हैं, ये किसी कैंसर या एड्स पीड़ित से पूछकर देखिए? कि जिंदगी के कुछ पल उसके लिए क्या अहमियत रखते हैं। दिल्ली की बुराडी की घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है, कि आखिर कोई कैसे मौते को इतनी आसानी से मोक्ष के लिए गले लगा सकता है?

इस तरह की ये कोई पहली घटना नहीं है, जिसमें धर्मांधता में अपने साथ अपने परिवार को मौत के घाट उतार दिया। इससे पहले भी अलग -अलग जगहों पर इस तरह की घटनाएं हो चुकी है। कई जगह पर तो मरने वालों की संख्या सैकड़ों में थी।

घटना 1978 की है। 18 नवंबर के दिन 918 लोगों ने सामूहिक आत्‍महत्‍या कर ली थी। इसमें 276 बच्‍चे भी शामिल थे। ये घटना इंडियाना की है। इसको जोंसटाउन भी कहा जाता है। इस घटना के बाद एक टेप भी सामने आया जिसमें सामूहिक आत्‍महत्‍या की बात करते सुना गया था। इतना ही नहीं इस टेप में आत्‍महत्‍या के तरीकों पर भी चर्चा करते हुए लोगों को सुना गया था। पिपुल्‍स टेंपल के नाम पर आज भी इस घटना को याद किया जाता है।।

जरुर पढ़ें:  पाकिस्तानी बहन ने पीएम मोदी को बांधी राखी, 36 साल पुराना है रिश्ता

इस घटना को जिस शख्‍स ने अंजाम दिया था उसका नाम जिम जॉन्‍स था। इस घटना को यह कहते हुए अंजाम दिया गया था कि वह सामूहिक आत्‍महत्‍या नहीं कर रहे हैं बल्कि एक अमानवीय दुनिया की हालत के खिलाफ क्रांति लाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। इस दौरान जॉन्‍स को छोड़कर सभी को साइनाइड दिया गया था। ये साइनाइड कॉकटेल में मिला कर दिया गया था जबकि खुद उसने अपनी जान गोली मारकर ली थी।

Templar Cross used by the group.

सोलर टेंपल की घटना भी इसी तरह की घटना है। ऑर्डर ऑफ़ द सौर मंदिर एक गुप्त संगठन था जो एलीस्टर क्रॉली और फ्रीमेसनरी की शिक्षाओं से प्रभावित था।इस घटना में करीब 74 लोगों ने सामूहिक आत्‍महत्‍या की थी। आत्‍महत्‍या करने वाले इन लोगों का मानना था कि दुनिया के पाखंड, झूठ हिंसा और उत्पीड़न के खिलाफ उठाया गया यही एक उपाय है और उनका मानना था कि एक नए ग्रह पर जाकर वह सभी राज करेंगे। जेनेवा की इस घटना से लोग काफी घबरा गए थे। साथ ही इस घटना के बाद भी फ्रांस, स्विटजरलैंड और कनाडा में 1994-95 के दौरान ऐसे ही कुछ और मामले भी सामने आए थे।

जरुर पढ़ें:  शर्मनाक- हवस की आग में जल रही मां ने 15 साल के बेटे के साथ किया सेक्स
Heaven gate incident.

1997 में हैवन गेट की घटना ने सभी को दहशत में डाल दिया था। 24 से 27 मार्च के बीच करीब 39 लोगों ने आत्महत्या अंजाम दिया था। केलिफोर्निया के सेन डियागो में घटी इस घटना को आज भी अमेरिका के लोग नहीं भूल सके हैं। ये पूरा समूह कंप्यूटर प्रोफेशनल्स का था। इस ग्रुप की खुद की वेबसाइट थी जिसका नाम था ‘हैवन गेट’। इस सामूहिक आत्महत्या करने वालो का विश्‍वास था कि सर्वनाश हाथ में था और मोक्ष प्राप्त करने का एकमात्र तरीका उन्हें दूसरी दुनिया में माइग्रेट करना था और अपने विदेशी रचनाकारों के साथ एकजुट होना था। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, उन्होंने वोदका में जहर मिलाकर पी लिया और प्लास्टिक बैग की मदद से दम घोट लिया।
बांग्‍लादेश में भी इस तरह की ही एक घटना में एक ही परिवार के नौ लोगों ने अपनी जान दे दी थी। इस घटना को एडम हाउस के नाम से याद किया जाता है। 2007 में बांग्‍लादेश में मेमनसिंह के परिवार ने इस तरह की सामूहिक आत्‍महत्‍या का कदम उठाया था। परिवार के लोग ट्रैन की पटरी के नीचे आ गए थे। घटना के बाद उनके घर से मिली डायरी में इस घटना से जुड़े कुछ सुराग मिले थे इस डायरी से पता लगा था, कि इस परिवार ने धर्म परिवर्तन कर लिया था और वह एडम और ईव की तरह जिंदगी जीना चाहते थे। वह चाहते थे, कि उनके जीवन पर किसी भी एक धर्म को मानने की बात न कही जाए। इसलिए उन्‍होंने इस्‍लाम त्‍याग दिया था। वह कई बार काली की पूजा करते देखे गए थे। ये भी बतया जाता है, कि इस परिवार ने मरने से पहले खुद के लॉन में ग्रेव बना लिया था साथ ही कॉफिन भी रख दिया था। इससे कहा जा सकता है की वे अपने कदम को लेकर काफी कॉंफिडेंट थे।