आज सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में कोर्ट के आदेश को न मानने के मामले में माफीनामे को अस्वीकार कर दिया . चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि नागेश्वर राव ने स्पष्ट तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना की है. कोर्ट ने राव पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और साथ ही कोर्ट की मंगलवार की कार्यवाही खत्म होते तक उन्हें कोर्ट में बैठे रहने का आदेश दिया है.

सीजेआई के आदेश के मुताबिक , ‘स्वत: संज्ञान अवमानना में आरोप ये है कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ए के शर्मा को सीबीआई से बाहर ट्रांसफर किया गया. नागेश्वर राव ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है यह साफ है’.

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बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस में जांच की यथास्थिति को बरकरार रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए नागेश्वर राव ने जांच में शामिल सीबीआई अधिकारी एके शर्मा का ट्रांसफर कर दिया था. जिसके बाद कोर्ट ने राव को अवमानना का नोटिस भेजा था.

इस दौरान राव की तरफ से पेश हुए एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील दी कि राव का 30 साल का बेगाद करियर है और वह अपनी गलती के लिए माफी मांग चुके हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि वह राव के माफीनामे को अस्वीकार करते हैं.

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राव ने सोमवार को कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर माफी मांगी है. हलफनामे में नागेश्वर राव ने कहा कि वह अपनी गलती स्वीकार करते हैं. नागेश्वर राव की तरफ से दायर हलफनामे में लिखा है कि “अदालत के आदेश के बिना मुख्य जांच अधिकारी का ट्रांसफर नहीं करना चाहिए था, ये मेरी गलती है और मेरी माफी स्वीकार करें.” एम नागेश्वर राव ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी.

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