भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व करिश्माई कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को आपने बेहतरीन कप्तानी और धुंआधार बल्लेबाजी करते हुए तो देखा ही होगा. जिस तरह धोनी विकेट के पीछे बल्लेबाजों को चमका देकर स्टंप करते हैं उसी तरह धोनी सरहद पर दुश्मनों को स्टंप करते नजर आएंगे. धोनी अब कुछ दिन खेल के मैदान पर बल्ला नहीं चलाएंगे बल्कि बॉर्डर पर बंदूक थाम कर देश की रक्षा करते नजर आएंगे.

वैसे आप इस बात से बेखबर तो नहीं होंगे कि धोनी ने क्रिकेट में अपना कितना योगदान दिया है वैसे धोनी को क्रिकेट के अलावा सेना में जाने का बहुत शौक था. जिस तरह धोनी क्रिकेट को बड़ी जिम्मेदारी के साथ खेलते आए हैं उसी तरह हमें यकीन है कि सरहद पर भी धोनी जिम्मेदारी के साथ देशवासियों की रक्षा करेंगे.

टेरीटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद से नवाजे गए महेंद्र सिंह धोनी 15 अगस्त तक अपने साथी जवानों के साथ कश्मीर की हिफाजत के लिए दिन रात तैनात रहेंगे. धोनी किसी भी बड़े अफसर के साथ नहीं बल्कि अपने साथी जवानों के साथ बैरेक में ही रहेंगे और दो शिफ्ट में काम भी करेंगे. बता दें कि उन्हें किसी भी तरह का स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं दिया जाएगा बल्कि उन्हें खाना भी वही मिलेगा जो बाकी के जवान खाते हैं. धोनी की ड्यूटी दक्षिण कश्मीर के ऐसे इलाके में लगाई गई है जहां आतंकी गतिविधियां काफी ज्यादा होती है. तो लेफ्टिनेंट कर्नल महेद्र सिंह धोनी दक्षिण कश्मीर के अवंतिपुरा इलाके में ड्यूटी पर तैनात रहेंगे. वहीं सबसे जरुरी बात ये है कि धोनी ऐसे वक्त में अपने लेफ्टिनेंट कर्नल होने का रोल निभा रहे होंगे जब कश्मीर में तनाव का माहौल है और साथ ही 15 अगस्त भी मनाना है.

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क्या आपके मन में ये सवाल नहीं उठ रहा है कि धोनी तो एक क्रिकेटर हैं तो वो सेना में पहुंच कैसे गए? दरअसल 2011 में टैरीटोरियल आर्मी ने उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद रैंक से नवाजा था. जिसके बाद ये जरुरी भी नहीं था कि वो सेना में जाकर काम करें लेकिन उनके मन में देशप्रेम की भावना थी जिसकी वजह से उन्होंने सेना प्रमुख से इसकी मंजूरी देने के लिए आग्रह भी किया था और सेना प्रमुख बिपिन रावत ने भी उनके आग्रह को मंजूरी दे दी थी. और आप लोगों से भी उनके देशप्रेम की भावना छुपी नहीं होगी आप जानते ही होंगे कि वर्ल्ड के एक मैच में भी वो एक ऐसा ग्लब पहनकर आए थे जिसपर सेना का बलिदान चिन्ह था. और अब वो आर्मी के साथ सरहद पर उसी तरह सारे काम करेंगे जिस तरह बाकी के जवानों को करना पड़ता है.

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वैसे आप ये भी सोच रहे होंगे कि ये टैरिटोरियल आर्मी होती क्या है? दरअसल टैरिटोरियल आर्मी यानि क्षेत्रीय सेना, सेना का एक हिस्सा होती है. इसका काम होता है कि सेना कि जगह पर प्राकृतिक आपदा के समय उससे निपटना और आवश्यक सेवाओं के रख रखाव में नागरिक प्रशासन की सहायता करना.

तो ऐसे में ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि धोनी लोगों को लिए एक प्रेरणा भी हैं. और तो और 15 अगस्त जैसे मौके पर अपने देश की रक्षा करना उनके लिए बहुत गर्व की बात होगी. वैसे इंडियन क्रिकेट टीम अभी वेस्टइंडीज के साथ होने वाली सीरीज के लिए वेस्टइंडीज गई हुई है जिसका हिस्सा धोनी नहीं है उनकी जगह ऋषभ पंत को मौका दिया गया है.

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