दुनिया आज वहां पहुंच गई है, जहां लोग कभी जाने की सोच भी नहीं सकते थे। जिस चांद को लोग सिर्फ दूर से चमकता देखते थे, आज वहां जाकर उस पर रिसर्च किया जा रहा है। इतना ही नहीं नए-नए गैजेट्स का भी अविष्कार हो रहा है। और ये सब संभव हुआ है तकनीक की वजह से। इसका एक नमूना है मोबाइल फोन, इस फोन में क्या नहीं है ? किसी जगह का पता चाहिए, बैंक चाहिए, बिल भरना है। सबकुछ फोन के एक क्लिक से हो सकता है, या यूं कहे कि इस छोटी सी स्क्रीन से आप पूरी दुनिया की सैर कर सकते हैं। लेकिन ये फोन कुछ लोगों की आँखों में अब खटकने लगा है, इसे लोग संस्कारों से जोड़ने लगे हैं।

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क्या फोन से इंसान बिगड़ सकता है? ये सवाल इसलिए, क्योंकि कुछ लोग फोन को बिगड़ने की वजह बताकर इसपर पाबंदी लगा रहे हैं। लोगों के पास वैसे समस्याओं के यूनिक समाधान है, लड़कियों से रेप हो रहे हैं, तो उनके कपड़े जिम्मेदार, घर से भाग रही है, तो फोन जिम्मेदार। इसमें घर वाले, संस्कार देने वाले दोनों गायब है। दोष हैं तो इन निर्जीव वस्तुओं का।

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दारुल उलूम देवबंग

खबर यूपी के सहारनपूर से हैं, जहां के इस्लामिक शिक्षण संस्थान में छात्रों के स्मार्टफोन यूज़ करने पर पूरी पाबंदी लगा दी है। ये दारुल उलूम देवबंद नाम का इंस्टीट्यूट है , जहां बच्चों को ये वार्निंग दी गई है, कि अगर वो स्मार्टफोन यूज़ करते हैं तो उनका नाम संस्थान से काट दिया जाएगा। आपको बता दें, कि दारुल उलूम में देश-विदेश के कई बच्चे इस्लामिक स्टडीज पढ़ने आते हैं। जिन्हें अब स्मार्टफोन यूज करने की सख्त मनाही है। दारुल उलूम के वीसी मौलना अबुल कासिम नोमानी का कहना है कि..

‘बच्चों को एजुकेट करने के साथ उन्हें संस्कारी भी बनाना हैं, फिल्म, क्रिकेट और इंटरनेट पर गैर जरुरी साइट देखने वाले स्टूडेंट को नहीं पढ़ाया जाएगा, कैमरे और फीचर वाले फोन को दारुल उलूम में यूज करना क्राइम होगा’

दारुल उलूम देवबंग

वीसी ने फोन के लिए सभी स्टूडेंट से ये कहा कि वो ज़रुरी बात करने के लिए सिंपल फोन यूज़ कर सकते हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल पढ़ाई के वक्त नहीं किया जाएगा। इस फैसले पर दारुल के सभी स्टूडेंट ने सहमती जताई है। और इस फैसले का सभी स्वागत भी कर रहे हैं। हालांकि इसके उलट सैमसंग नाम की कंपनी का एक विज्ञापन इन दिनों टीवी पर खूब सुर्खियां बंटोर रहा है इस विज्ञापन में दिखाया गया है, कि कैसे स्मार्ट क्लास और स्मार्ट टैब के ज़रिए एक गरीब का बच्चा विदेश तक चला जाता है।

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ये दीगर बात है, कि इस्लाम में इसी स्मार्टफोन से वाट्सएप्प पर भेजा जाने वाला तलाक जायज है। लेकिन उसी स्मार्टफोन से अगर आप कुछ सीखना चाहते हैं। आगे बढ़ना चाहते हैं, तो उसपर पांबदी है। एक बार हमें सोचना चाहिए, कि इस तरह के फैसले लेकर और उसमें सहमति जताकर हम किस दिशा में जा रहे हैं। दुनिया तरक्की की नई-नई मीनारें खड़ी कर रही है और हम संस्कारों का जाप कर फिर उसी अंधी दुनिया की ओर लौटना चाह रहे हैं। जहां से विकास और तरक्की कोसों दूर है?

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