किसी ने ठीक ही कहा है, कि मौत कभी बता कर नहीं आती। ये न वक्त देखती है और न इन्सान की हैसियत। मौत का अपना एक अलग रुतबा है। जब ये आती है तो इसे कोई टाल भी नहीं सकता। भले ही कैमरा ऑन क्यों न हो! आगे जो वीडियो आप इस पोस्ट में देखेंगे, वो इस बात में शक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ता, कि जब मौत आती है तो कुछ हो जाए, जाने वाले को साथ लिए बिना नहीं जाती।

ये वीडियो ऋषिकेश का है, है दो दिन पुराना लेकिन इसमें सबक हमेशा के लिए नया है। हर इंसान की तरह कुंदन सिंह भी गंगा माँ की गोद में अपने पापों को धोने गया था लेकिन उसे क्या पता था, कि गंगा माँ उसे हमेशा के लिए अपनी गोद में ही सुला लेंगी। उसकी एक लापरवाही उसके लिए जानलेवा साबित हुई और चंद सेकंड्स में उसे मौत की नींद सुला गई।

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वो दोस्त जो जीते जी उसकी वीडियो बनाने में लीन था, वही उसकी मौत का अंतिम गवाह बना। हालांकि, उसने लोगों से अपने दोस्त को बचाने की गुहार भी लगाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

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दिल्ली का रहने वाला कुंदन, गंगा में डुबकी लगाने के लिए नीचे उतरता है और अपने दोस्तों से उसकी वीडियो बनाने के लिए कहता है। पहले वो चैन पकड़कर पानी की गहराई नापता है और जब ये यकीन हो जाता है, कि पानी ज्यादा गहरा नहीं है, वो इस चैन को छोड़ देता है। इस बीच पानी का तेज बहाव उसे कब गहराई में खींच लेता है, शायद वो भी नहीं समझ पाता और फड़फड़ाने लगता है। देखने वाले इसे महज ‘तैराकी की कोशिश’ समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और फिर जो होता है वो रौंगटे खड़े कर देता है।

पानी में दोस्त कब डूब गया ये शायद वीडियो बनाने वाले को भी पता नहीं चला और जब चला, तब तक शायद बहुत देर हो चुकी थी। मौत का ये मनहूस मंजर कैमरे पर हूबहू कैद हो जाता है और आस-पास के लोग चिल्लाने के बाद भी हाथ-पर-हाथ धरे बैठे रहते हैं।

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बेशक, लापरवाही के चलते उस इंसान की जान चली गई लेकिन उसकी मौत एक नहीं बल्कि कई सवाल पीछे छोड़ गई है। क्या इस हादसे को किसी भी सूरत में टाला जा सकता था? महज कुछ देर के शौक के पीछे, अपनी जिंदगी को यूं दाव पर लगाना कहां तक जायज है? अगर वक्त रहते वहां मौजूद लोगों ने मुस्तैदी दिखाई होती तो क्या कुंदन सिंह की जान बचाई जा सकती थी?

मौत कोई नई बात नहीं है लेकिन कैमरे में कैद हुई मौत की live तस्वीरें अपने-आप में कई सवालों को हमारे लिए छोड़ गई हैं, जिनका जवाब, किसी और को नहीं बल्कि हमें खुद को देना है।

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