अभी हाल ही में चुनाव आयोग ने हैकेथॉन का आयोजन किया था, देसी भाषा में कहे, तो सियासी पार्टियों को चुनौती दी थी, कि आओ और हमारी मशीन को छेड़कर दिखाओ। लेकिन उस आयोजन में किसी पार्टी ने जाने की हिम्मत नहीं की और चुनाव आयोग वैसे ही जीत गया। अब लोगों का भ्रम दूर हो गया था, कि किसी ने चुनाव आयोग का चैलेंज एक्सेप्ट नहीं किया इसका मतलब ये है, कि मशीन एकदम ठीक है। लेकिन अब जो खबर आ रही उसने फिर ईवीएम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सियासी दल इस पर इसलिए भी ज्यादा हल्ला मचाएंगे, क्योंकि मामला बीजेपी शासित महाराष्ट्र से ही सामने आया है। और यहां इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम से छेड़छाड़ की बात साबित हो गई है। अब आप कहेंगे ये चमत्कार कैसे हुआ तो, सुन लीजिए बीजेपी का ये कथित भांडाफोड़ एक सूचना के सिपाही ने किया है। मतलब आरटीआई कार्यकर्ता ने। सूचना के अधिकार से जो इस सिपाही को जानकारी मिली है, उसके मुताबिक मशीन को छेड़ा गया था और निर्दलीय प्रत्याशी का वोट बीजेपी के खाते में जा रहा था।  

जरुर पढ़ें:  देवर को सेक्स के उकसाती थी भाभी, परेशान देवर ने उठाया ये खौफनाक कदम

ये सूचना आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को मिली है, जिन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में हाल ही में हुए परिषद के चुनाव में इस तरह का मामला सामने आया। यहां के लोणार के सुल्तानपुर गांव में मतदान के दौरान ईवीएम को टेंपर्ड करने की बात सामने आई है।

आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया, कि

“जब भी मतदाता चुनाव चिह्न नारियल का बटन दबाते तो बीजेपी के चुनाव चिह्न कमल के सामने वाला एलईडी बल्ब जल उठता। निर्वाचन अधिकारी ने इसकी जानकारी डीएम को दी, जिसका खुलासा आरटीआई से मिली जानकारी में हुआ।”

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली

दरअसल इस गड़बड़ी की शिकायत चुनाव में खड़ी निर्दलीय प्रत्याशी आशा अरुण जोरे ने की थी। ये मतदान 16 फरवरी को हुआ था। शिकायत के बाद निर्वाचन अधिकारी से मामले की जांच रिपोर्ट तलब की गई थी। इसी मामले से जुड़ी आरटीआई 16 जून को गलगले ने डाली थी, जिसके जवाब में बताया कि मतदान केंद्र संख्या-56 पर लगी इस ईवीएम में गड़बड़ी पाई गई थी और वोटर जब भी नंबर एक पर मौजूद निर्दलीय उम्मीदवार के चुनाव चिह्न नारियल के सामने वाला बटन दबाता, चार नंबर वाले बीजेपी प्रत्याशी के चुनाव चिह्न के सामने वाली बत्ती जलती थी, जिससे वो वोट बीजेपी उम्मीदवार को चला जाता था।

जरुर पढ़ें:  किन्नरों का मज़ाक बनाने वाले सावधान, पहले जोइता मंडल से मिल लीजिए

परेशान करने वाली बात ये है, सुबह 10 बजे जब निर्दलीय प्रत्याशी ने इसकी शिकायत निर्वाचन अधिकारी से की तो उन्होंने इसपर कोई कार्रवाई करने से इंकार कर दिया। लेकिन जब खुद मतदाताओं ने आपत्ती उठाई तब जाकर निर्वाचन अधिकारी को होश आया और दोपहर डेढ़ बजे इसपर संज्ञान लिया। और जांच की गई तो मामला सही पाया गया।

मामले की सूचना बड़े अधिकारियों को दी गई, मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने भी शिकायत सही पाई, जिसके बाद चुनाव को ही रद्द कर दिया गया। और मतदान केंद्र को बंद कर गड़बड़ ईवीएम मशीन को सील कर साथ ले गए। अब आरटीआई कार्यकर्ता कह रहे हैं, कि इस बात से साबित होता है, कि ईवीएम में छेड़छाड़ की जा सकती है।

जरुर पढ़ें:  दुनिया की तीसरे सबसे भरोसेमंद सरकार हैं मोदी सरकार, वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम की रिपोर्ट
अनुपम खेर के साथ अनिल गलगली

इससे पहले मध्यप्रदेश से भी ऐसा ही एक मामला सामने आ चुका है, जब मशीन के डेमो के वक्त किसी भी पार्टी को वोट देने पर बीजेपी की पर्ची निकल रही थी। तब भी निर्वाचन अधिकारियों ने इसे डेमो में गड़बड़ी बताकर मामले से पल्ला झाड़ लिया था। इसी घटना के वक्त निर्वाचन अधिकारी सलीना मिडिया को धमकाते भी दिखी थीं।

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here