मौत जिंदगी का सबसे स्याह पन्ना होता है। इसके बाद सबकुछ खत्म हो जाता है, इसलिए हर कोई ये मिन्नते करता है, कि मौत उससे जितनी दूर रहे, उतना बेहतर है। लंबी उम्र के लिए तमाम तरह के पूजा-पाठ किए जाते हैं। लेकिन क्या कोई मौत के लिए पूजा-पाठ कर सकता है? मौत से मोक्ष पाने के बारे में सोच सकता है। यकीनन ये सवाल ऐसे हैं, जिसका जवाब आपके लिए ना हो सकता है, लेकिन दिल्ली के बुराड़ की दास्तां इन सवालों को भी लाजवाब कर देती है।

Delhi Burari Case

अंधविश्वास के साए में सन्ना कर देने वाली ये दास्तां देश की राजधानी की है। एक पढ़ा लिखा संभ्रांत परिवार। जिसके मिसाले मुहल्ले से लेकर नाते-रिश्तेदारों में दी जाती थी। लेकिन उस परिवार की सामुहिक खुदकुशी ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। दुनिया ये समझ नहीं पा रही है, कि क्या कोई इस हद तक भी जा सकता है। दिल्ली के बुराड़ी में एक घर में परिवार के 11 लोगों ने फांसी लगाकर जान दे दी। इन 11 लोगों में से 2 नाबलिक लड़के भी शामिल थे। नाते-रिश्तेदार मानने को तैयार नहीं है, कि ये परिवार ऐसा कदम भी उठा सकता है। उनको इसमें साजिश की बू आ रही है। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस इस खौफनाक केस की कड़ी से कड़ी जोड़ते जा रही है, नए-नए और सनसनीखेज खुलासे होते जा रहे हैं। पुलिस के हाथ कई ऐसे सबूत लगे हैं, जिससे ये साफ़ होता है, कि ये मर्डर नहीं, धार्मिक कारणों से की गई सामूहिक आत्महत्या है।

पुलिस के मुताबिक, अपने खुशहाल भविष्य और एक आत्मा को खुश करने के लिए, भाटिया परिवार के 11 सदस्य फ़ांसी के फंदे पर झूल गए। पुलिस के मुताबिक ये परिवार भाटिया नहीं थे, बल्कि चुंडावत थे। प्रियंका की मम्मी प्रतिभा ने भाटी से शादी की थी, जिनकी मौत हो गई। वे ट्यूशन पढ़ाती थीं तो बच्चे उन्हें भाटिया मैम बोलते थे, इसलिए सब उन्हें भाटिया बोलने लगे। मरने वालों में 77 साल की नारायण देवी, उनकी बेटी 57 साल की प्रतिभा और दो बेटे भावनेश  और ललित भाटिया, भावनेश की पत्नी सविता और उनके तीन बच्चे मीनू, निधि और ध्रुव के साथ ललित भाटिया की पत्नी टीना और उनका 15 साल का बेटा शिवम , प्रतिभा की बेटी प्रियंका शामिल हैं। प्रियंका की पिछले महीने ही सगाई हुई थी और इस साल के अाखिर तक उसकी शादी होनी थी।

जरुर पढ़ें:  चलती बस में बीजेपी के ठरकी नेता ने किया सेक्स, वीडियो आया सामने
Bhatiya / Chundawat Family File pic

आपको ये जानकर हैरानी होगी, कि इन 11 मौतों की तैयारी पिछले 11 साल से की जा रही थी। इसके लिए बाकायदा रजिस्टर बनाए गए थे और उनमें एक-आक बात दर्ज की जाती थी। बात तब से शुरू हुई, जब परिवार के मुखिया भोपाल सिंह की मौत हो गयी थी। मौत के कुछ दिनों बाद से उनके सबसे छोटे बेटे ललित के अंदर अपने पिता भोपाल सिंह की आत्मा आने लगी थी। ललित और उसके घरवालों को ये यकीन हो गया था, कि ललित के अंदर भोपाल सिंह की आत्मा आती है। ललित अक्सर अपने पिता की आवाज़ में ही अपने घर वालों से बातें करता था। पिता की मौत के बाद घर का हर फैसला ललित ही लेता था। घर वालों को ऐसा लगता था, कि ये फैसले ललित नहीं उनके स्वर्गवासी पिता भोपाल सिंह ले रहें हैं। अगर कोई ललित की बात नहीं मानता, तो ललित उन्हें अपने पिता के नाम पर डराता था। काम नकारने पर वो घरवालों को धमकाया करता था। बताया जाता है, कि ललित अपने पिता के बहुत ही करीब था। पिता की मौत के बाद ललित 3 महीनों तक मौन रहा था।

Lalit Bhatiya

घटना के बाद जब इस मामले में पुलिस ने छानबीन करनी शुरू की, तो उन्हें भाटिया परिवार और उनके बीच फैली अंधविश्वास की पूरी कहानी समझ में आने लगी। छानबीन के दौरान पुलिस को घर से 11 पाइप, 11 एंगल वाले रोशनदान के साथ-साथ 11 रजिस्टर भी मिलें। इन रजिस्टरों में फ़ांसी लगाने के तरीके से लेकर मौत तक की हर एक बात लिखी मिली है। साथ ही साथ ललित ने पिछले 10 सालों में अपने मृत पिता की आत्मा से जो भी बातें की थी वो सब इन रजिस्टरों में लिखी मिली है। पुलिस को घर के किसी भी सदस्य पर कोई चोट या ज़बरदस्ती के निशान नहीं मिलें हैं।

जरुर पढ़ें:  Birthday Special- धौनी के बारे में वो सीक्रेट बातें, जो शायद आप नहीं जानते हैं
Notes written in register

आपको बता दें, कि ग्यारहवे रजिस्टर में अाखिरी नोट 30 जून 2018 को लिखा गया था, जिसने इस पूरे मामले की गुत्थी सुलझाने में पुलिस की मदद की। रजिस्टर के इस एंट्री में लिखा है ‘घर का रास्ता, 9 लोग जाल में, बेबी (विधवा बहन) मंदिर के पास स्टूल पर, 10 बजे खाने का ऑर्डर, मां रोटी खिलाएगी, एक बजे क्रिया, शनिवार-रविवार रात के बीच होगी, मुंह में ठूंसा होगा गीला कपड़ा, हाथ बंधे होंगे।’ इसमें आखिरी पंक्ति है- ‘कप में पानी तैयार रखना, इसका रंग बदलेगा, मैं प्रकट होऊंगा और सबको बचाऊंगा’। भाटिया परिवार के लोगों को ये विश्वास था, कि ललित के मृत पिता भोपाल सिंह सबको बचाने ज़रूर आएंगे। पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज मिला जिसमें, स्टूल लाते हुए नीतू और उसकी मां दिख रही हैं। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज में घटना की रात 10.20 बजे घर में नीचे फर्नीचर की दुकान से बच्चे तार लेकर ऊपर जाते देख गए। बता दें, कि भाटिया परिवार 6 स्टूल घटना वाले दिन, रात में 10 बजे खरीदकर लाया था।

CCTV Footage

घटना वाली रात भाटिया परिवार ने 20 बटर रोटियों का आर्डर किया था। ऋषि नाम का एक डिलीवरी बॉय 20 रोटियां देने गया था, जो उस घर में जाने वाला आखिरी इंसान है। ऋषि के मुताबिक जब वो वहां गया तो परिवार के सदस्य सामान्य दिख रहे थे। घर के मंजर से उसे किसी तरह की आशंका नहीं हुई, कि यहां इतनी बड़ी घटना होने वाली है।

Bill of the last Order

पुलिस के मुताबिक, साल 2007 से ललित के पिता उसके सपने आ रहे थे। वो पिछले 11 सालों से अपने पिता की आवाज़ में अपने घर वालों से बात कर रहा था। परिवार का नाम खराब न हो इसलिए ये बात परिवार के 11 सदस्यों के अलावा किसी को नहीं पता थी। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, घर में कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं मिला है, न ही कोई आध्यात्मिक पुस्तक मिली है, सिर्फ हनुमान चालीसा और गायंत्री मंत्र मिले हैं। 24 जून 2018 से पूजा शुरू की गई थी। घर में पूजा सात दिनों से चल रही थी। खुदकुशी के लिए 9 लोगों ने 5 स्टूलों का इस्तेमाल किया था। छठा स्टूल प्रतिभा को इस्तेमाल करना था। प्रियंका को सेंटर में रखना था। रजिस्टर में ऐसा लिखा पाया गया है, कि इस पूजा के बाद सबकी शक्तियां बढ़ जाएंगी। पूजा के ख़त्म होने के बाद सबको एक दूसरे के हाथ खोलने में मदद करनी थी। दोनों भाई और ललित की पत्नी टीना के हाथ खुले थे। फांसी लगाने के लिए जिस चुन्नी और कपड़ों का इस्तेमाल हुआ, वो भी टीना और उसकी मां उसी दिन पास के ही बाजार से लाए थे। इन रजिस्टरों में तीन से चार हैंडराइटिंग मिली हैं। रजिस्टर में ललित बोलता था और ज्यादातर प्रियंका लिखती थी। ललित को घर के लोग काका कहते थे और सपने में आने वाले उसके पिता को पूरा घर डैडी कहता था।

जरुर पढ़ें:  इस अंकल ने भतीजी के साथ की बलात्कार से भी ज़्यादा घिनौनी हरकत
Superstition that took lives of innocent people

पुलिस ने जब रजिस्टरों को पढ़ा, तो पाया कि परिवार का खुदकुशी का कोई इरादा नहीं था। ये परिवार बरगद की तपस्या कर रहा था और 30 जून को 12 से 1 बजे रात्रि के बीच सबको बरगद के पेड़ की शाखाओं की तरह खड़ा होना था। किसको कहां, कैसे खड़ा होना है, क्या करना है, ये सब रजिस्टर में पहले से ही लिखा था। ये तपस्या वे अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए कर रहे थे, लेकिन एक दर्दनाक हादसे के साथ उनकी कहानी ही खत्म हो गई और वो हमेशा के लिए उस अंधेरी दुनिया में चले गए, जहां से लौटना उनके लिए मुमकिन नहीं है।