गुजरात में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जीत गई है। वैसे भी स्मृति ने हारना सीखा ही नहीं है, उनकी जिंदगी से जुड़े किस्सों को अगर आप पढ़ेंगे, तो आपको यकीन हो जाएगा, कि स्मृति बचपन से कितनी जिद्दी और जीवट हैं। वो जो ठान लेती हैं, वो करके रहती हैं, फिर उसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़े।

पीेएम मोदी के साथ स्मृति ईरानी

ये सभी जानते हैं, कि स्मृति ईरानी एक टीवी कलाकार थीं और छोटे पर्दे की बहू के रूप में घर-घर में पहचानी जाती थीं। लेकिन उनका छोटे पर्दे तक का ये सफर कितनी कठिन था ये शायद ही कम लोग जानते हो। 1998 में उन्होंने पहली बार मिस इंडिया कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया था और उन्होंने इस कॉन्टेस्ट के फाइनल तक पहुंचकर अपनी उस जिद का ही परिचय दिया था। दरअसल इस कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने के लिए स्मृति के पिता ने उन्हें मना कर दिया था। बावजूद इसके स्मृति ने इसमें हिस्सा लिया और फाइनल तक पहुंचीं।

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स्मृति ईरानी

स्मृति के पिता पंजाबी और माँ असमिया थीं। उनके घर की माली हालत ठीक नहीं थी। पिता कुरियर कंपनी चलाकर घर का जैसे-तैसे गुजारा करते थे। घर की आर्थिक हालत की वजह से स्मृति अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाई और पिता की मदद के लिए उन्होंने दिल्ली में ब्यूटी प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग शुरू कर दी। हालांकि इसी दौरान उन्हें किसी ने मुंबई में किस्मत आजमाने की सलाह दी और उसके बाद वे अपनी किस्मत का दांव लगाने मुंबई आ गईं और यहीं पर पहली बार मिस इंडिया कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेना चाहा, लेकिन पिता ने इसके लिए पैसे देने से इनकार कर दिया। हालांकि स्मृति की मां ने जैसे-तैसे पैसे का जुगाड़ कर स्मृति की इस काम के लिए मदद की थी।

मॉडल के रूप में स्मृति ईरानी

माँ के पैसे लौटाने के लिए की नौकरी

स्मृति कॉन्टेस्ट जीत नहीं पाई और फिर उनके सामने माँ के पैसे लौटाने का संकट खड़ा हो गया, तो उन्होंने इसके लिए नौकरी ढूंढनी शुरू कर दी और जेट एअरवेज में फ्लाइट अटैंडेंट के लिए आवेदन दिया। यहां भी स्मृति की किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। उन्होंने इस दौरान कई मॉडलिंग ऑडिशन भी दिए, लेकिन हर जगह से उन्हें रिजेक्शन ही मिला। इसके बाद उन्होंने मैकडोनाल्ड में नौकरी ज्वाइन कर ली। यहां उन्हें  फर्श तक साफ करना पड़ा था। इसका खुलासा खुद उन्होंने किया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

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दोस्तों के साथ स्मृति ईरानी

आखिरकार उन्हें छोटे पर पर्दे पर काम करने का मौका मिला और टीवी सीरियल ‘क्यूंकि सास भी बहू थी’ से वो देशभर में विख्यात हुईं। 2001 में उन्होंने पारसी बिजनसमेन जुबिन ईरानी से शादी कर ली। चूंकि स्मृति ईरानी का बचपन से ही RSS से संबध था इसलिए उनका झुकाब बीजेपी की तरफ होना लाज़िमी थी। स्मृति के दादाजी RSS स्वयंसेवक थे और मां जनसंघी। स्मृति ने 2003 में बीजेपी ज्वाइन की और एक साल बाद ही उन्हें महाराष्ट्र यूथ विंग का वाइस-प्रेसिडेंट बनाया गया, और इसी साल उन्हें कपिल सिब्बल के खिलाफ दिल्ली की चांदनी चौक सीट से लोकसभा चुनाव की टिकट दे दी गई। लेकिन यहां भी उनके हाथ मायूसी ही लगी और वो बुरी तरह हार गईं।

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अपने पति जुबीन ईरानी के साथ स्मृति

लेकिन स्मृति ने हार नहीं मानी। 2010 में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव और महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनाया और 2014 में देश के कद्दावर राजनीतिक घराने के युवा राहुल गांधी के खिलाफ यूपी की अमेठी से लोकसभा चुनाव में उतारा। यहां भी उन्हें नाकामयाबी ही हाथ लगी। लेकिन उनकी न हारने की जिद की वजह सेही उन्हें मोदी सरकार में मानव संसाधन और विकास मंत्रालय का जिम्मा मिला। अभी स्मृति ईरानी केंद्रीय कपड़ा और सूचना एवं प्रसारण मंत्री हैं।