2009 में कलर्स चैनल पर आया एक सीरियल अगर आपको याद हो, तो ये किस्सा कुछ उसी से मिलता-जुलता है। इस सीरियल में नकुशा नाम की लड़की बेहद ही काली और बदसुरत होती हैं। जिसको समाज की बुरी नज़र से बचाने के लिए ऐसा बनाया जाता है। यानी असल में नकुशा काली नहीं होती, बल्कि लोगों की बुरी नज़र से बचाने के लिए उसके मुंह पर काला तेज लगाया जाता है। लेकिन वो सीरियल था, जिसमें उसको अपने प्यार भी मिला और खूबसूरती भी, लेकिन असल जिन्दगी की नकुशा बनी लड़कियों के लिए कौन मसीहा बनेगा। समाज में लड़कियों के साथ बढ़ रहे अपराधों पर सरकार तो नकेल कसने में नाकाम ही दिख रही है, घर में रहने वाली लड़कियां अपने आप को चार दीवारी में बंद कर मेहफूज हो जाती है, लेकिन उनका क्या जो रात के अंधेरे में बेघर होने की वजह से सड़कों पर जिंदगी काटते हैं।

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बेघर लड़कियों की नकुशा जैसी जिन्दगी

असल जिन्दगी की नकुशा बनना कितना कठिन है। ये तो वो लड़कियां ही समझ सकती हैं, जो बेघर हैं और अफनी इज्जत बचाने के लिए इस तरह के तरीके अपनाती हैं। ये बेहद ही होश उड़ा देनी वाली बात है, कि खुद बलात्कारियों से बचाने के लिए उन बेचारी लड़कियों को ऐसा कदम उठाना पड़ता है। हम बात कर रहे हैं, कोलकता की लड़कियों की। जिनके पास ना तो सर छुपाने की जगह है और ना ही अपनी इज्जत बचाने के लिए कोई सहारा।

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बंगाल की बेघर औरतों और लड़कियों को अपनी इज्जत के लिए इसी तरह का रास्ता अपनाना पड़ता है। वैसे तो देश में ऐसी कई महिलाएं हैं, जिनके पास खुद का ना तो परिवार है और ना ही कोई घर। जिनका ठिकाना बसों और रेलवे स्टेशनों पर होता है। विलेज स्क्वेयर में छपी खबर के मुताबिक कोलकता में जो औरते बेघर हैं वो अपनी बच्चियों के चेहरे पर नकुशा की तरह राख और तेल पोत देते हैं। ताकि उनकी खूबसूरत लड़कियों की इज्जत शादी होने तक बची रहे और जैसे ही लड़कियों युवा अवस्था में आती है उनकी शादी कर देते हैं।

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सरकार से नहीं मिलती कोई मदद

2011 के जनगणना के अनुसार इंडिया में करीब 93 लाख लोग ऐसे हैं, जिनके पास रहने के लिए कोई घर नही था और अब ये आंकड़ा 3 करोड़ को पार कर चुका है। वही, अकेले कोलकता में 15 लाख से भी ज्यादा लोग बेघर हैं। इनमें से लगभग 20,000 बच्चे हैं।

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सरकारी आंकडों में इनमें से आधे लोगों को भी जगह नहीं मिल पाती है। शेल्टर हाउस भी उतनी संख्या में नहीं बन पाते हैं, जितनी उन्हें ज़रुरत है। इतना ही नहीं, इन्हें खाने के लिए भी किसी भी तरह की कोई मदद नहीं मिल पाती है। क्योंकि सरकारी राशन के लिए पहचान पत्र होना ज़रुरी होता है। जिनके घर ना हो, उनका पहचान पत्र कैसा?

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कुछ महिलाएं बलात्कार से नहीं, खाना ना मिलने से डरती हैं

वही, कोलकता में कई बेघर महिलाएं ऐसी भी है, जिनको अपनी इज्जत का डर नही सताता है, लेकिन उन्हें घर और खाने का डर रहता है, कि आज उन्हें कहा सोना पडेगा और कहा से खाना मिलेगा। यानी लड़कियां अपनी इज्जत को सौदा कर कुछ पैसा कमाती हैं, जिससे खाना तो एक बार को मिल जाता है, लेकिन अपने लिए सर छुपाने के लिए छत नहीं ढ़ूंढ पाती हैं।

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इतना ही नहीं, इन्हें ड्रग्स जैसी बुरी आदतों का भी शिकार होना पड़ जाता है. उनकी जिन्दगी एक ड्रग्स में डुबी हुई जिन्दगी बन गई है। भले ही इन्हें कालिख लगाने की चिंता नो हो, लेकिन ये बिचारी भी घर और खाने के लिए धक्के खाती हैं।