लड़कियों का रात में घर से बाहर अकेले जाने के लिए मना किया जाता है, कहा जाता है कि ‘लड़की जात है रात में घर से निकलेगी तो कोई भी ऊंच-नीच हो सकती है’। लेकिन अब लोग क्या कहेंगे? मनचले तो अब रात के अंधेरे का इंतजार भी नहीं करते, उनकी निगाहें अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट में चल रही लड़कियों पर हैं, जो उन्हें वहां खुलेआम छेड़ते हैं। 

निर्भया कांड के बाद आरोपियों के वकील न कहा था, कि लड़कियां मिठाई की तरह होती है, फूलों की तरह होती हैं। खुले में रहंगी तो मुश्किल होगी ही। तब लोगों ने इस बयान को सिर्फ उस वकील की मानसिकता से जोड़ा था, लेकिन वो बयान उस पूरे समाज का चेहरा था, जो लड़कियों को सिर्फ एक उपभोग की वस्तू समझते हैं। तभी ऐसी घटनाएं घट रही हैं और लोग विरोध करने के बजाय इस जुर्म में शरीक हो जाते हैं।

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ताजा मामला मध्यप्रदेश की औद्योगिक नगरी इंदौर का है, इसे मप्र का एजुकेशन हब की कहा जाता है। पूरे प्रदेश के साथ ही देश के कोने-कोने से यहां लड़कियां पढ़ने आती हैं। लेकिन हवस की आग में डल रहे भेडियों की नज़र उन लड़कियों पर होती है। कॉलेज जाने वाली लड़कियों को ये अपना शिकार बनाते हैं। ऐसे ही एक लड़की पर बस में यौन हमला किया गया और जब उसने विरोध किया, तो उसके मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसके साथ गन्दी हरकतें की गई।  सबसे शर्मनाक बात ये रही, कि चलती बस में, लोगों की भीड़ के बीच ये सब होता रहा और लोग नपुंसक बनकर जिंदा लाशों की तरह ये सब होते देखते रहे।

दरअसल पुलिस भर्ती परीक्षा  की तैयारी कर एक लड़की रतनपुर से इंदौर जा रही बस में कोचिंग के लिए जा रही थी। बस खचाखच भरी थी। उसमें कुछ मनचले लड़के भी सवार थे, जिन्होंने लड़की के साथ छेडछाड शुरु कर दी। लड़की ने इसका विरोध किया, तो बदमाशों ने उसके मुंह में कपडा ठूंस दिया और उसके साथ गंदी हरकतें करने लगे। लड़की अपने बचाव में हाथ-पैर चलाने लगी तो, बदमाशों ने भरी बस में लड़की के साथ मारपीट भी की। सबसे हैरानी वाली बात ये रही, कि इंसानों की भीड़ ये सब होते हुए देख रही थी, लेकिन विरोध करने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पाया। यहां तक कि बस का ड्राइवर और कंडक्टर ने भी लड़की की मदद की बजाय बदमाशों को बस से भगाने में मदद की।

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पीडित लड़की अपने साथ हुई घटना की शिकायत लेकर भवरकुंआ थाने पहुंची, लेकिन वहां भी उसे पुरुषप्रधान समाज की गंदी सोच से दो-चार होना पड़ा। दूसरे थाने का मामला बताकर उसे वहां से बिना कार्रवाई के चलता कर दिया गया। पीडित छात्रा उस खुडैल थाने भी पंहुची जहां का पता पिछले थानेदार ने दिया था, लेकिन यहां भी पुलिस ने कार्रवाई से इंकार कर दिया। 24 घंटे बाद छात्रा फिर परिजनों के साथ भंवरकुआ थाने गई। लेकिन फिर उसे मायूस होना पड़ा। आखिरकार पीडित छात्रा ने इसकी शिकायत पुलिस के आला अधिकारियों से की, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

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मामले के बाद पुलिस की इस कार्यप्रणाली से लड़की के परिजन आक्रोशमें हैं और पुलिस से वो दो घंटे की छूट की मांग कर रहे हैं। ताकि वो उन लफंगों को पुलिस के सामने पेश कर सकें। गुस्साएं परिजन कानून अपने हाथ में लेने को तैयार दिख रहे हैं। लेकिन अब पुलिस लड़की पर सारा दोष मड़कर बदमाशों पर कार्रवाई का भरोसा दे रहे हैं।