केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दायर की गई पुनह विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आज सुनवाई शुरू कर दी है. इनमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल हैं. इस मामले में याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट को तब तक दखल नहीं देना चाहिए जब तक कुछ गलत ना हो.

इस पूरे विवाद में अपना रुख बदलते हुए ट्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (टीडीबी) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को दर्शन करने का अधिकार मिलना चाहिए. बता दें कि मंदिर का प्रबंधन टीडीबी ही देखता है.

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कोर्ट चार महीने पहले ही मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. कोर्ट के फैसले के विरोध में केरल के कई इलाकों में हिंसक प्रदर्शन हुए थे. इस मुद्दे को लेकर सत्ताधारी सीपीएम और बीजेपी-कांग्रेस के बीच जमकर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई थी.

इस मुद्दे को लेकर कोर्ट में करीब 65 समीक्षा याचिकाएं दायर की गई है, इसके अलावा अदालत की अवमानना की याचिकाएं भी दायर की गई हैं. समीक्षा याचिकाओं पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच सुनवाई कर रही है. यह बेंच उन याचिकाओं की वैधता की जांच के बाद विचार करेगी कि उन पर समीक्षा की जा सकती है या फिर उन्हें खारिज किया जाए.

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कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में आदेश दिया था कि केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं. किसी को आयु या लिंग के आधार पर मंदिर जाने से नहीं रोका जा सकता है. बता दें कि इससे पहले सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म के उम्र (10 से 50 साल) की लड़कियों और महिलाओं को प्रवेश की इजाजत नहीं थी.

 

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