नई दिल्ली। जब हम बात करते हैं एकता की, भाईचारे की, तो सहज ही मन में इस एकता और भाईचारे के इस बंधन को एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा की बात आती है. कहा जाता है कि हर चार कोस के बाद भाषा बदल जाती है. किसी भी प्रदेश को एक सूत्र में बांधने की क्षमता अगर किसी में है तो वो सिर्फ भाषा के अंदर है. भाषा अपनी शोम्यता और सरलता से देश के एक सूत्र में बांधती है.

इस लिहाज से देखा जाए तो भारत देश को एक सूत्र में बांधने की क्षमता हिंदी में दिखती है. हिंदी देश की एकता का मंत्र है. हिंदी की भूमिका देश में आजादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण रही है. हिंदी की लिपि देवनागरी है और इसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ लिपि का मानी जाती है. देश के महापुरूषों ने आजादी के समय से ही हिंदी की ताकत को समझ लिया था. जिसके बाद महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर सहित अन्य महापुरूषों ने हिंदी को ही जन-जन तक अपनी बात पहुंचाने का माध्यम बनाया.

आज देश की आजादी के 70 सालों ने हिंदी ने नई लकीर खींची है. हिंदी न सिर्फ भारत अपितु विश्व के कई देशों में बोली जाने वाली भाषा बन गई है. सिर्फ भारत वर्ष में 70 करोड़ से अधिक नागरिक हिंदी भाषा का प्रयोग लिखने और बोलने में करते हैं. इसके साथ-साथ समस्त दक्षिण एशियाई देशों सहित फिजी, गुयाना, सुरिनाम, त्रिनिदाद जैसे देशों में भी हिंदी बोली और समझी जाती है. फिजी, गुयाना, सुरिनाम, त्रिनिदाद जैसे देशों को तो हिंदी भाषियों ने ही बसाया है.

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21वीं सदी में हिंदी के प्रचार-प्रसार के बाद इस भाषा ने नई-नई ऊंचाईयों को छुआ है. हिंदी की लोकप्रियता इतनी है कि 21वीं सदी में अन्य भाषाओं के साहित्य का अनुवाद हिंदी में किया जा रहा है. आज हिंदी का रोजगारपरक होना इसकी सबसे बड़ी खूबी है. हिंदी ने करोड़ों भारतीयों को रोजगार प्रदान किया है. दुनिया में बढ़ते बाजारीकरण और भूमंडलीकरण के दौर में हिंदी बाजार के लिए अनिवार्य और जरूरत बन गई है.

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हिंदी के बढ़ते प्रभाव को बड़े-बड़े विद्वान भी स्वीकार करते हैं. गुजरात में जन्मे आर्य समाज के प्रवर्तक महर्षि दयानंद ने अपनी रचना सत्यार्थ प्रकाश को हिंदी में लिखा और इस बात का उद्घोष किया कि आजादी की लड़ाई में भी हिंदी की भूमिका जबरदस्त रही है. विश्व आर्थिक मंच ने अपनी गणना में हिंदी को विश्व की दस सबसे शक्तिशाली भाषाओं में स्थान दिया है. 21वीं सदी में हिंदी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी और प्रमुख भाषा है.

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माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स भी हिंदी के कायल रह चुके हैं और उन्होंने हिंदी के बारे में कहा था कि जिस दिन दुनिया में बोलकर लिखने की तकनीक विकसित हो जाएगी, उस दिन हिंदी अपनी लिपि की श्रेष्ठता की वजह से सर्वाधिक सफल भाषा होगी. बिल गेट्स की बात आज चरितार्थ हो रही है.

हिंदी अंग्रेजी के साथ-साथ चीन की मंडारिन भाषा से भी आगे है. संख्या के अनुसार अंग्रेजी से भी ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है हिंदी. दक्षिण एशिया में पूरा पाकिस्तान हिंदी बोलता है। बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, तिब्बत, म्यांमार, अफगानिस्तान में भी हिंदी को खूब बोली और समझी जाती है. हालांकि हिंदी को अभी संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा में शामिल नहीं किया गया है.

विश्व में जनसंख्या के हिसाब से देखें तो हिंदी बोलने वाले लोगों की संख्या तकरीबन 1 अरब है. इतनी बड़ी संख्या में बोली जाने वाली हिंदी भाषा आसानी से विश्वभाषा बन सकती है. इसकी वजह है हिंदी के पास ज्यादा बोलने वाले लोग की संख्या.

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भारत में हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में 14 सितंबर 1949 संविधान में शामिल करने का फैसला हुआ और इसे 14 सितंबर 1950 को राष्ट्रभाषा का दर्जा प्रदान किया गया. इससे पहले 1917 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी गुजरात के भरुच में सर्वप्रथम राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी को मान्यता प्रदान की थी. आजादी के बाद यानी 1950 में संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के तहत हिन्दी को देवनागरी लिपि में राजभाषा का दर्जा दिया गया.

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राजभाषा का दर्जा दिये जाने के बाद 14 सितंबर 1953 को पहली बार हिंदी दिवस मनाया गया. बाद में भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन राजभाषा विभाग का गठन किया गया, जबकि 1960 में भारत के राष्ट्रपति के आदेशानुसार आयोग की स्थापना हुई. 1963 में राजभाषा अधिनियम पारित हुआ और 1968 में राजभाषा संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया.

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