ना बाप बड़ा ना भईया, सबसे बड़ा रुपैया, गाहे-बगाहे ये बातें आपको कई बार सुनने को मिली होगी। आज के दौर में हो भी यही रहा है, पैसों के आगे सारे रिश्ते-नाते कमजोर हो गए हैं। पैसों के लिए इंसान कितना गिर सकता है, इसकी कई मिसालें आपने देखी होगी, लेकिन आज जो खबर आप पढ़ने जा रहे हैं। वो इंसानी रिश्तों की मौत का चरम है। इंसानी शर्म के पाताल में घुसने की बानगी है। पति को परेमेश्वर कहा गया है, इसीलिए पत्नी अपने पति पर सबसे ज्यादा भरोसा करती हैं। लेकिन एक पति ने अपनी ही पत्नी को किसी ओर के सामने सिर्फ इसलिए परोस दिया, क्योंकि उसे पैसे चाहिए थे।

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रिश्तों को कलंकित करने वाला और उससे विश्वास खत्म करने वाला ये मामला राजस्थान से सामने आया है। जहां एक पति ने पैसों की जरुरत के चलते अपनी ही पत्नी के अवैध संबध दोस्त के पिता से बनवाएं और वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग का खेल शुरु कर दिया। ये पति पैसे के लालच में इतना पागल हो गया, कि उसने पैसों की उगाही के लिए अपनी ही बीवी का सहारा लिया और उसकी इज्जत को दांव पर लगा दिया। मामला जयपुर शहर से सामने आया है। जहां ब्लैकमेलिंग से परेशान एक शख्स ने अपनी जान दे दी। मामले की जब जांच की गई तो बेहद की चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

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जयपुर के रहने वाले सीताराम और हरमाडा के रहने वाले लालचंद के बीच बेहद गहरी दोस्ती थी। दोस्ती इतनी गहरी थी, कि दोनों परिवारों में घर आना-जाना लगा रहता था। लालचंद के पिता कल्याण सहाय जो पेशे से माली थे, वे भी सीताराम के घर आते थे। कल्याण सहाय उम्रदराज व्यक्ति थे। लेकिन उनकी नज़र सीताराम की पत्नी पर रहती थी, कल्याण सहाय जब-जब सीताराम के घर जाता, तो उनके बच्चों के लिए खाने-पीने की चीजें भी लाया करता था और जब कभी कुछ लाना भूल जाता था। तो सीताराम को बहाने से मार्केट भेज देता था, जिसके बाद कल्याण सहाय सीताराम की पत्नी से प्यारभरी बातें और इश्क लडाया करता था।

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ये नाजायज प्यार गुल खिलाने लगा और कल्याण सहाय और सीताराम की पत्नी सुनीता के बीच शारीरिक संबध भी बनने लगे। उन दोनों के बीच रात-रात भर फोन पर बातें होने लगी। ऐसा नहीं है, कि इस बात की खबर सुनीता के पति सीतारम को नहीं थी। सीताराम का जीजा हनुमान सहाय भी हर बात से वाकिफ था कि सुनीता और कल्याण के बीच संबध हैं। लेकिन किसी ने इस बात का विरोध नहीं किया बल्कि इस बात का फायदा उठाया और कल्याण सहाय को फंसाने का प्लान बनाया, जिसमें सुनीता का भी पूरा हाथ था।

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8 अगस्त को सुनीता ने कल्याण सहाय को फोन किया और 9 अगस्त को अपने घर बुलाया, कल्याण को उसने बता दिया था, कि सीताराम घर पर नहीं है। 9 अगस्त को कल्याण बिना कुछ सोचे-समझे सुनीता के घर पहुंच गया, दोनों ने हमेशा की तरह घर में ही शारीरिक संबध बनाए। उसी वक्त प्लान के मुताबिक सीताराम और हनुमान सहाय भी वहां पहुंच गए, और दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया। इसी हालत में सीताराम ने अपनी पत्नी और कल्याण सहाय का वीडिया भी बना लिया। और इसके बाद शुरू हुआ कल्याण को ब्लैकमेल करने का खेल। दोनों ने कल्याण को इतना टॉर्चर किया, कि कल्याण सहाय ने परेशान होकर आत्महत्या कर ली। जब कल्याण सिंह के बेटे लालचंद को इस बात का पता चला, तो उसने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी और अपने पिता की अात्महत्या की जानकारी दी।

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पुलिस ने मामले की जांच शुरु की, तो पूछताछ में पता चला कि सुनीता उर्फ सुष्मिता, पति सीताराम और जीजा हनुमान सहाय ने ब्लैकमेलिंग का जाल बिछाया था। जिस बात से कल्याण सहाय बिलुकल अनजान था और इसी बात का फायदा उठाकर उन्होंने कल्याण सहाय से पैसा हड़पने शुरु कर दिए। और पैसे न देने और अपनी इज्जत जाने के डर से कल्याण ने खुदकुशी कर ली। अब जयपुर पुलिस ने तीनों आरोपियों को ब्लैकमेलिंग के आरोप में और कल्याण सिंह की मौत के लिए जिम्मेदार मानते हुए गिरफ्तार कर लिया है।

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