किन्नर या ट्रांसजेंडर जिसे समाज ने कभी अपना हिस्सा माना ही नहीं। समाज और लोग हमेशा इन्हें हमेशा तिरछी निगाहों से देखते रहा है, उनका मज़ाक उड़ाता रहा है, खासकर भारत में। विदेशों में ऐसे हालात नहीं है। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी धमक और काबीलियत से अपना एक मुकाम हासिल किया। शबनम मौसी का चुनाव जीतना हो या सागर की कमला बुआ का मेयर बनना या और दूसरे किन्नरों का सत्ता की दहलीज़ पर कदम रखना, ये उनकी जीवटता का उदाहरण ही है।

देश की पहली किन्नर विधायक शबनम मौसी

लोकतंत्र के तीन अहम खंभों में से एक पर काबिज होकर अपने होने का अहसास करने वाले ट्रांसजेंडर अब दूसरे अहम पिलर न्यायपालिका की ओर भी कदम बढ़ा चुके हैं। जोइता मंडल इतिहास के पन्नों में पहली किन्नर जज के तौर पर दर्ज हो गई है। 8 जुलाई 2017 को ट्रांसजेंडर जोइता के साथ ही पूरे भारत के लिए भी खास दिन बना। पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर की लोक अदालत ने जोइता मंडल को जज नियुक्त किया है।

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ट्रांसजेंडर जोइता मंडल

जोइता अब उस पद पर आसिन हो गई है, जहां समाज का उसे सलाम ठोकना लाजिमी है। लेकिन उसके यहां तक पहुंचने का सफर इतना आसान नहीं था। जोइता पहले BPO में नौकरी किया करती थीं, लेकिन छोटी मानसिकता रखने वाले लोगों की वजह से जोइता को ये नौकरी छोडनी पड़ी थी। रोज़-रोज़ के ताने, गंदी निगाहें और सोच में भरा कचरा उसे असहज कर देता था। अपने बीते हुए बुरे वक्त को याद कर जोइता कहती है…

‘मुझे किसी ने सेक्शुअली या फिज़िकली परेशान तो नहीं किया था, लेकिन लोग मेरे बारे में बातें किया करते थे। मुझे घूरा करते थे। मेरा मज़ाक उड़ाते थे। हालात इतने खराब थे, कि मैं वहां काम करके डिप्रेस हो चुकी थी, फिर मैंने नौकरी छोड़ने का फैसला ले लिया’

नौकरी छोडने के बाद जोइता को कुछ रातें बस स्टॉप पर सोकर गुज़ारनी पड़ी, क्योंकि धर्मशालाओं में जाने की मंजूरी नहीं थी। जोइता चाहती तो दूसरे किन्नरों की तरह वो सड़कों या ट्रेनों में पैसे मांगकर अपना गुज़ारा कर सकती थीं। लेकिन उसके ज़मीर ने इसकी इजाजत नहीं दी। और कहते हैं, जिसके हौंसले बुलंद हो तो वो कुछ भी कर सकता है। और आज जोइता एक जज की भूमिका निभा रही हैं।

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2011 से ही जोइता ने अपनी कम्युनिटी के लोगों के लिए काम करना शुरु कर दिया था। सीलीगुड़ी में मंशा बंगला नाम की उनकी एक संस्था है जिसे जोइता चलाती है। बाद में उन्होंने नोतुन आलो सोसाइटी (DNAS) खोली। इस सोसाइटी में LGBTQ के लिए काम करती हैं, जिसका मतलब है लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल, ट्रांसजेंडर और क्विर। इस संस्था में किसी भी जेंडर के लोग आकर रह सकते हैं। इस सोसाइटी को 93 ग्रुप्स का सपोर्ट है, जो हिजड़ों, ट्रांसजेंडर और समलैंगिकों के मुद्दों पर काम करते हैं। इसके अलावा उन्होंने एक ओल्ड एज होम भी खोला है।

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