बैंगलुरू की एक पत्रकार की हत्या का मुद्दा इनदिनों खूब सुर्खियों में है, सच लिखने और समाज के सामने सियासत को नंगा करने वाली इस पत्रकार को घर में घुसकर कुछ अपराधियों ने गोली से भून दिया। इस घटना के बाद पूरे देश में गुस्से का उबाल है, पत्रकार बिरादरी में काफी आक्रोश है। आरोप लगाए जा रहे हैं, कि गौरी लंकेश को कट्टरपंथियों ने मारा है, क्योंकि गौरी ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। वैसे अपने उसूलों के लिए जाने जानी वाली इस पत्रकार को जेल जाने की सज़ा भी सुनाई गई थी।

Journalist Gauri Lankesh

हिंदुत्व और जातिगत राजनीति के विरोध के लिए जाने जानी वाली कन्नड और अंग्रेजी भाषा की पत्रकार गौरी लंकेश को उनके विरोधियों ने हमेशा के लिए अपने रास्ते से हटा दिया है। गौरी रोजमर्रा की तरह ही रात को ऑफिस से अपने घर लौटी थीं। लेकिन उन्हें क्या पता था, कि ये रात उनकी आखरी रात होगी। गौरी जब घर के बरामदे में रात के वक्त टहल रही थी, उसी वक्त तीन बाइक सवार हमलावरों ने गोलियों से उन्हें छलनी कर दिया। गौरी पर 7 राउंड गोलियां चलाई गई, जिनमें से तीन उनके सिर, गर्दन और सीने में जा लगी। गोलियों की आवाज़ सुनकर पड़ोसियों ने हंगामा मचाया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

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अपनी मौत की वजह से सुर्खियों में आई गौरी उस वक्त भी खासी सुर्खियों ने आई थीं, जब उन्होंने 2008 में एक आर्टिकल ‘Darodegilada BJP Galu’ लिखा था। इसी आर्टिकल की वजह से बीजेपी के नेता प्रह्राद जोशी औक उमेश धुसी ने उनके खिलाफ मानहानी की मुकदमा दर्ज किया था। इसी केस में उन्हें कई बार कोर्ट में पेश होना पड़ा और इसी मामले में नवंबर 2016 में कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए, 6 महीने जेल की सज़ा और 10,000 रुपए का जुर्माना लगाया था। लेकिन उन्हें उसी दिन सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत भी मिल गई थी, और फिलहाल वो ज़मानत पर ही बाहर थीं।

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Journalist Gauri Lankesh

आपको बता दें, कि गौरी लंकेश अपने पत्रकार पिता के शुरू किए हुए टैबलॉयड अखबार को चलाती थीं। ‘लंकेश पत्रिके’ नाम के इस अखबार में कोई विज्ञापन नहीं लिया जाता था, इसे 50 लोगों का एक ग्रुप चलाता था और सरकार और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ खुलकर लिखा जाता था। लंकेश की इसी बेबाकी की वजह से उनके चाहने वालों की तादात काफी हैं लेकिन उनसे नफरत करने वालों की कमी भी नहीं थी। इसीलिए आज गौरी लंकेश हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके आदर्श, उसूल और निर्भिक पत्रकारिता के सिद्धांत हमेशा उनके पीछे भी उनके नाम के साथ जीवित रहेंगे।

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