नई दिल्ली। पाकिस्तान की मलाला युसुफ़ज़ई के बाद नादिया मुराद दूसरी महिला हैं, जिन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार मिला है। आईएस की बर्बरता की शिकार हुई नादिया नरसंहार, अत्याचार और ह्यूमन ट्रैफिकिंग से जूझ रही महिलाओं और बच्चों के लिए काम करती है।

ये नादिया वहीं हैं जो आईएस जैसे खूंखार आतंकी संगठन के चंगुल से बचकर निकली हैं। 2018 का शांति का नोबेल पुरस्कार यज़ीदी महिला अधिकार कार्यकर्ता 25 बर्षीय नादिया मुराद को मिला। नादिया ने अपने जीवन में दर्द और तकलीफों का एक लंबा दौर सहा है।

आईएस के चंगुल से बचकर निकलने के बाद नादिया ने एक किताब लिखी जिसमें उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों के बारे में लिखा है। किताब में उन्होंने जिक्र किया है कि किस तरह से आईएस के कब्जे में रहने के दौरान उनकी जिंदगी नर्क बन गई थी। नादिया को शांति का यह नोबेल बलात्कार के खिलाफ जागरुकता फैलाने के लिए दिया गया है।

नादिया को 2014 में इस्लामिक स्टेट ने अगवा कर लिया था और तीन महीने तक बंधक बनाकर उनका बलात्कार किया था।

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आइए जानते हैं नादिया की पूरी कहानी-

नादिया अपनी मां और भाई-बहनों के साथ उत्तरी इराक़ के शिंजा के पास कोचू गांव में रहती थी। अपने परिवार के साथ वह एक खुशहाल जिंदगी जी रही थीं लेकिन साल 2014 में जब इराक पर आईएसआईएस के जुल्म की शुरुआत हुई तो सब बदल गया। सुन्नी कट्टरपंथी संगठन IS ने उन्हें बंधक बना लिया। IS के आतंकवादी मुराद से सेक्स स्लेव का काम लेते थे, मतलब IS के लड़ाके उनसे अपनी हवस की भूख मिटाते थे।

आईएस की खूंखार और वहशीपन के बारे में नादिया बताते वक्त फफ़क पड़ती हैं। वह रोते हुए अपने साथ हुए जुल्मों के बारे में बताती है। नादिया ने अपनी किताब ‘द लास्ट गर्ल: माई स्टोरी ऑफ कैप्टिविटी एंड माई फाइट अगेंस्ट द इस्लामिक स्टेट’ में लिखा है, कि ‘IS के चंगुल से भागने की कोशिश करने वाली लड़कियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया जाता था’।

अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए लिखा- ‘मैंने एक बार मैं मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहनी जानी वाली पोशाक पहनकर भागने की कोशिश की, लेकिन एक गार्ड ने मुझे पकड़ लिया। उन सभी ने मेरे साथ तब तक बलात्कार किया, जबतक मैं होश नहीं खो बैठी। उस वक्त आपकी कोई मदद नहीं करता था। आतंकियों ने उन्‍हें आईएसआईएस के ही एक और आतंकी के घर पर रखा हुआ था।

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नादिया ने यूएन के सामने बताया था कि कि अगस्‍त 2014 को आईएसआईएस के आतंकियों ने उनके साथ 150 याजिदी परिवारों को और याजिदी लड़कियों को अगवा कर लिया था। यहां से इन सभी को इराक के शहर मोसुल ले जाया गया था। नादिया ने बताया, कि आईएसआईएस ने करीब तीन महीने तक उन सभी को अपना सेक्‍स स्‍लेव बनाकर रखा।

इराक के सिंजर में आईएसआईएस के आने से पहले याजिदी समुदाय के लोग रहते थे। सिंजर के गांव कोचों में नादिया का घर था। एक दिन अचानक उनके गांव में आईएसआईएस आतंकियों का फरमान आया। आतंकियों ने सभी पर इस्‍लाम कुबूल करने का दबाव डाला।

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नादिया ने बताया कि उनके माता-पिता और सभी लोग घर से बाहर आए। आतंकियों महिलाओं को एक बस में भरकर कहीं ले गए और गांव के 300 से ज्‍यादा पुरुषों को गोली मार दी। नादिया के भाई भी मार दिए गए थे और गांव की बूढ़ी औरतों को भी मार दिया गया। नादिया ने बताया कि आतंकी सभी लड़कियों को आपस में किसी सामान की तरह बदलते थे। आतंकियों से डरकर कई लड़कियों ने छत से कूदकर जान तक दे दी थी।

नादिया ने बताया कि आतंकी उन पर प्रार्थना करने का दबाव डालते और फिर वह उनके साथ बलात्‍कार करते थे। एक दिन मौका पाकर वह कैदखाने से भाग निकलीं और मोसुल के शरणार्थी कैंप में पहुंचीं। बता दें कि करीब 5,000 याजिदी महिलाओं को आतंकियों ने बंधक बनाया हुआ था।

नादिया ने सभी देशों से अपील की कि सभी देश एक साथ आएं और आईएसआईएस का खात्मा करें। आईएस के चंगुल से छूटने के बाद नादिया बलात्कार पीड़ित महिलाओं और लड़कियों के लिए काम करने लगीं।

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