2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार से नाराज चल रहे सरर्णों को साधने के लिए मोदी सरकार ने 10 फीसद आरक्षण देने का फैसला लिया है. इस फैसले पर केंद्रीय कैबिनेट ने मुहर भी लगा दी है.

जिसके बाद अब सवर्ण जातियों को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा. ये आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को मिलेगा. तो चलिए आपको बताते हैं कि सवर्णों को दिए जाने वाले 10 फीसदी आरक्षण पर किसने क्या कहा…

नीतिश कुमार(जेडीयू) – सामान्‍य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने के फैसले का मैं स्‍वागत करता हूं. इससे गरीब सवर्णों को विकास की मुख्‍यधारा में लाने में मदद मिलेगी.

रामदास अठावले(केंद्रीय मंत्री) – आरक्षण को ले‍कर दलितों और सवर्णों के बीच कई बार टकराव हो चुका है. यह फैसला मोदी सरकार का मास्‍टर स्‍ट्रोक है. इससे सवर्णों और पिछड़े वर्ग के बीच असमानता खत्‍म होगी.

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विजय सांपला(केंद्रीय मंत्री) – मोदी सरकार का ये एक ऐतिहासिक कदम है. इस फैसले का उन लोगों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिन्‍हें इस समय आरक्षण मिल रहा है.

विनय सहस्‍त्रबुद्धे(भाजपा उपाध्‍यक्ष) – आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण के फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई. ये सामाजिक न्‍याय का दायरा बढ़ाने की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम है.

सुधाकर रेड्डी (माकपा महासचिव) – गरीब सवर्णों का आरक्षण महज एक चुनावी जुमला है. इसके बदले सरकार को निजी क्षेत्रों में आरक्षण के लिए प्रयास करना चाहिए.

अरविंद केजरीवाल(आप) – गरीब सवर्णों को आरक्षण के फैसले का आम आदमी पार्टी समर्थन करती है. इसे कानून बनाने का लिए सरकार को संसद का सत्र बढ़ा देना चाहिए. अन्‍यथा ये चुनावी स्‍टंट माना जाएगा.

उमर अब्दुल्ला(नेशनल कॉन्फ्रेंस) – सवर्ण जाति के गरीबों के लिए आरक्षण का फैसला. लगता है कि लोकसभा चुनाव के लिए बिगुल बज चुका है.

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असदुद्दीन ओवैसी(एआइएमआइएम) – आरक्षण दलितों के साथ ऐतिहासिक अन्‍याय को सही करने के लिए है. संविधान आर्थिक आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है.

अशोक गहलोत (राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री) – आर्थिक रूप से पिछड़ों को 14 फीसद आरक्षण दिया जाना चाहिए. इसके लिए उन्निस सौ अट्ठानवे (1998) में ही मुख्‍यमंत्री रहते हुए मैंने केंद्र की तत्‍कालीन BJP सरकार को पत्र लिखा था.

तेजस्‍वी यादव(राजद नेता) – आ‍रक्षण आर्थिक स्थिति बेहतर करने का जरिया नहीं है. ये सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों के प्रतिनिधित्‍व के लिए है. अगर सरकार सामान्‍य वर्ग के गरीबों की स्थिति सुधारना चाहती है, तो 15 लाख रुपये और नौकरी देनी चाहिए.

ममता बनर्जी(पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री) – मेरा सवाल है कि क्‍या चुनाव के नाम पर कोई सरकार जनता को ठग सकती है. सरकार को स्‍पष्‍ट करना चाहिए कि ये लागू होगा या नहीं? ये कानूनी रूप से वैध है या नहीं?

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बता दें, मोदी सरकार को सवर्णों को आरक्षण देने के लिए जल्द ही संविधान में बदलाव करना होगा. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में बदलाव किया जाएगा. दोनों अनुच्छेद में बदलाव कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा.

बता दें कि पिछले साल जब सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट में बदलाव करने का आदेश दिया था तब देशभर में दलितों ने काफी प्रदर्शन किया था. इसको देखते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदल दिया था. ऐसा माना जा रहा था कि मोदी सरकार के इस फैसले से सवर्ण काफी नाराज हो गए, दलितों के बंद के बाद सवर्णों ने भी भारत बंद का ऐलान किया था.

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