आज से पहले आपने सुना होगा, कि डॉक्टर ने ऑपरेशन कर दौरान मरीज के पेट में कैंची छोड़ दी या टॉवेल छोड़ दिया, जिसे ऑपरेशन कर निकाला गया। या फिर किसी शख्स के पेट से बालों का गुच्छा निकाला गया हो, लेकिन ये आपने ये सुना है, कि किसी इंसान के पेट से लोहे का खजाना निकाला हो। यकीनन नहीं, लेकिन आज आपको हम ऐसी ही एक चौेंकाने वाली तस्वीर दिखाने जा रहे हैं, जिसे देखकर और ये न्यूज़ पढ़कर आपको अपने आंख और कान दोनों पर यकीन नहीं होगा लेकिन ये सौ फीसद सच है।

Demo Pic-Opration

खबर मध्यप्रदेश के रीवा जिले से आई है, जहां रहने वाले मोहम्मद मसूद के पेट से 263 सिक्के, कुछ किले, ब्लेड और लोहे की जंजीर को निकाला गया है। हैरान कर देने वाली बात ये है, कि इतना लोहा पेट में होने के बावजूद मोहम्मद जिंदा है। लेकिन इसके चलते उनके पेट में हमेशा दर्द और परेशानी बनी रहती थी। जिसकी वजह से वो जगह-जगह अपना इलाज करा रहा था। लेकिन असल बात किसी डॉक्टर के पकड़ में नहीं आ रही थी। लेकिन जब असली जांच की गई, तो पता चला की मोहम्मद के पेट में 263 सिक्के, डेढ किलो बड़ी लोहे की कीले, 13 से 12 शेविंग ब्लेड, 6 इंच कुत्ते बाधने की जंजीर कांच के टुकडे और कई तरह की लोहे की चीजें पड़ी हैं।

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Reewa District Man Stomach has Iron

मसूद का इलाज 18 नंवबर को संजय गांधी मेडिकल कॉलेज में हुआ, जहां वो पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचा था। डाक्टरों ने बताया कि उन्होंने कुछ टेस्ट और एक्स-रे किए थे, जिसमें ये पता चला कि मसूद के पेट में लोहा है, जिसकी वजह से उनको दर्द रहता है। इस परेशानी का पता चलते ही छह डॉक्टरों की टीम ने मिलकर मसूद का ऑपरेशन किया

Man Stomach Has Iron

मसूद के पेट में इतना लोहा देख,डॉक्टर भी हैरत में पड़ गए थे, कि ये इंसान अब तक जिंदा कैसे है। अब तक डॉक्टरों के पास कांच, सुई और लोहे का टुकड़ा वाले मरीज आए थे, जिनका ऑपरेशन संजय गांधी अस्पताल के डॉक्टरों ने ही किया थे, लेकिन मसूद का केस बेहद ही हैरान कर देने वाला था। जिसने सभी को चौंका कर रख दिया। बता दें, कि मसूद की दिमागी हालत ठीक नही है, और वो ये सब चीजें छुप-छुप कर खाया करता था।

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फिलहाल ऑपरेशन के बाद मसूद आईसीयू में भर्ती है, जहां उनकी हालत ठीक बताई जा रही है। हालांकि मसूद के घर वालों का कहना है कि उनको काफी वक्त से दिखाया जा रहा था, लेकिन कोई भी डॉक्टर पता नहीं लगा पा रहा था,कि आखिर पेट दर्द होने के पीछे की वजह क्या है। इतना ही नहीं, मसूद का इलाज पहले सर्जरी विभाग में चल रहा था, जहां उन्होंने मसूद को टीबी की शिकायत बताई थी। लेकिन अराम ना मिलने पर मसूद को संजय गांधी अस्पताल लाया गया। ये वाकई चौंका देने वाली बात है, कि डॉक्टरों को पेट दर्द के लिए एक एक्स-रे भी नहीं सूझा और टीबी की दवाई खिलाते रहे है।

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