धोती, भारत का पुरातन पहनावा, जब इस देश में पैंट, जिंस और दूसरे परिधान नहीं पहुंचे थे, तब राजा से लेकर रंक तक यही धोती पहना करते थे। आज भी देश के कुछ हिस्सों में बुजुर्ग इसी पहनावे को पहनते हैं। आपको याद होगा देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पहनावे में भी धोती शामिल थी। और उनके ही क्यों देश के कई मौजूदा मंत्री भी इस परिधान को गर्व से पहनते हैं।

धोती पहनकर देश के ख्यातीनाम व्यक्ति

लेकिन ये धोती अब मॉडर्न लोगों के आंखों में खटकने लगी है। दरअसल भारत के एक राज्य पश्चिम बंगाल की राजधानी से जो खबर आई है, वो हमें ये कहने पर मजबूर कर रही है। शहर के क्वेस्ट मॉल में एक शख्स को इसलिए एंटर नहीं करने दिया क्योंकि उसने धोती पहन रखी थी। ये सुनकर आपने अपने माथे पर हाथ रख लिया होगा, क्योंकि जिस राज्य के पहनावे में धोती अहम रूप से शामिल थी, उसके नौजवानों के लिए ये देहाती या गवई पहनावा हो गया है। जिस शख्स के साथ ये बर्ताव हुआ उनका नाम आशीष अविकुंतक हैं। ये रही उनकी तस्वीर-

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मॉल कर्मचारी से बहस करते आशीष अविकुंतक

आशीष एक फिल्मकार हैं और वे उनकी दोस्त देबलीना सेन के साथ मॉल के एक रेस्तरां में गए थे, लेकिन उनके साथ ऐसा बर्ताव किया गया मानो वे किसी दूसरे ग्रह से आए प्राणी हो। सारे वाकया वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ देबलीना ने फेसबुक पर पोस्ट कर दिया। जिसके बाद दुनिया तक ये मामला पहुंचा।


देबलीना ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है- इससे पहले रेस्टोरेंट्स ने मना किया था, अब एक मॉल ने एंट्री पर रोक लगा रखी है। धोती कुर्ता पहने शख्स क्वेस्ट मॉल में नहीं जाने दिया गया। इस मॉल में धोती-लुंगी पहनकर जाना मना है। ये बेहद ही घिनौना भेदभाव है। जब मेरे दोस्त ने अंग्रेजी में बहस की, तो उसे अंदर जाने दिया गया। मैनेजमेंट के लोगों ने भी यही कहा, कि धोती या लुंगी पहनकर आना बैन है।

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देबलीना को गार्ड ने इस घटना का वीडियो बनाने से भी रोका लेकिन उसने ये वीडियो बनाकर फेसबुक पर अपलोड कर दिया है। साथ ही उसने लिखा कि अब बहुत हो गया मैं चुप नहीं रह सकती और हम अथॉरिटी से सवाल पूछेंगे। फिल्मों के अलावा रियल में ये शायद पहली घटना हो जब किसी को उसके ड्रेस की वजह से एक मॉल में जाने से रोका गया। वैसे इसके पीछे क्या तर्क होगा ये समझ से परे है। मॉल मैनेजमेट ने अगर ये तस्वीर नहीं देखी है, तो आंखों से आधुनिकता का चश्मा उताकर इस तस्वीर को ज़रूर देख लेना चाहिए, जिस पश्चिम से प्रभावित होकर मॉल दिखावे का ये ढोंग रच रहा है वहां की सड़कों पर भी हमारे देश का एक अभिनेता खुलेआम लुंगी लगाकर शान से घूम रहा है।

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न्यूयॉर्क की सड़कों पर लुंगी में अभिनेता नवाज़

मंदिर और कॉलेजों में भी ड्रेसकोड तय नहीं होता, अगर मॉल ये तय करने की लगे कि इंसान क्या पहनकर आए तो स्वतंत्रता की आजादी तो गई तेल लेने और भारत को चीन बनाने वाली ये सोच कहां से पैदा हो रही है ये भी सोचने वाली बात है। देबलीना ने सही कहा है, सवाल तो पूछना ही चाहिए, कि मॉल वालों को धोती से क्या दिक्कत है? क्या जो चीज मॉल में बिकती नहीं है, उसे पहनकर कोई वहां जा नहीं सकता है ?

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