चीन पूरी दुनिया में अपनी तानाशाही और मनमानी के लिए कुख्यात है। चीन में नागरिक अधिकारों का किस तरह से हनन होता है, इसके कई खबरें सामने आ चुकी है। मुसलमानों को तो वहां पर दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है, और वक्त-वक्त पर उनपर तरह तरह की पाबंदियां थोपी जाती हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात ये है, कि जो पाकिस्तान चीन को अपना हमदर्द मानता है, वो मुसलमानों के साथ हो रहे इस अत्याचार पर मौन कैसे हैं?

काशगर की मस्जिद के बाहर नमाज के लिए आया शख्स

ताज़ा मामला चीन की वेस्टर्न सिटी काशगर में मुसलमानों पर थोपी गई नई पाबंदी का है। हर साल रमज़ान के मौके पर इस इलाके की सबसे बड़ी मस्जिद में इबादत करने वालों का तांता लगा रहता था। लेकिन इस साल तस्वीर एकदम जुदा थी। मुसलमानों से गुलजार रहने वाली ये मस्जिद इस ईद पर खाली-खाली दिखाई दी। वजह थी मस्जिदों को बाहर तैनात फोर्स और दरवाजों पर लगे मेटल डिटेक्टर। स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले बीस-तीस सालों में पहली बार ईद पर मस्जिद की रौनक गायब है और नमाज़ के लिए इतने कम लोग जुटे हैं।

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ईद के दिन मस्जिद के बाहर तैनात फोर्स

चीनी प्रशासन ने जिनजियांग इलाके के उइगर मुस्लिम बहुल इलाके में पहले से कई सख्त पाबंदियां थोप रखी हैं। यहां नौजवान मुसलमानों के दाढ़ी रखने पर पाबंदी है, सार्वजनिक तौर पर कोई इबादत भी नहीं कर सकता है, यानी मस्जिद के अलावा कहीं भी नमाज़ पढ़ना या इबादत करना जुर्म है। सरकारी कर्मचारियों को रमजान के दौरान रोजा रखने की भी मनाही है। इन इलाकों में मुसलमानों को कैसे दबाया जा रहा है इसकी बानगी एक टीचर और एक सरकारी अधिकारी के इस बयान से मिलती है, जिसमें वे कहते हैं, कि “स्कूलों में छात्रों को सलाम बोलकर पारंपरिक अरबी अभिवादन करने से हतोत्साहित किया जा रहा है, सरकार समझती है कि ये इस्लामिक शब्द अलगाववाद के बराबर है”

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मस्जिद के बाहर लगे मेटल डिटेक्टर

चीनी प्रशासन का दावा करता है, कि ये पाबंदियां उसने इस्लामिक चरमपंथ और अलगाववादी गतिविधियों को काबू करने के लिए लगा रखी हैं। दरअसल 2009 में उरुम्की में सिलसिलेवार भड़के दंगों में करीब 200 लोगों की मौत हो गई थी। जिसके बाद चीन ने इन इलाकों में पाबंदियां ठोंकनी शुरु कर दी थी, जो अब तक जारी है।होटन शहर में तो हालात ये है, कि जुमे की नमाज के लिए मस्जिद में आने वाले लोगों को पुलिस बैरिकेड्स से होकर गुजरना पड़ता है और दो चेकपॉइंट्स पर पहचान पत्र भी दिखाना पड़ रहा है। इसकी वजह भी है इलाके में चरमपंथ का काफी तेज़ी से विस्तार हो रहा है। इसी से परेशान जिनजियांग के ज्यादातर लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान के खत्म होने के डर में जी रहे हैं।

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