भारत जहां जमीनी स्तर पर खुद को मजबूत करने में लगा है वहीं दूसरी तरफ अंतरिक्ष में भी भारत ने अपना कद बढ़ा लिया है. अभी थोड़े ही टाइम पहले अंतरिक्ष में मिशन शक्ति यानी वो परिक्षण जिसमें भारत ने अंतरिक्ष में उपग्रह को एसेट रॉकेट से मार गिराया था. लेकिन अब एक बार फिर भारत आसान में भी हर मुश्किल से लड़ने के लिए तैयार है. जी हां अब अंतरिक्ष में अपनी सुरक्षा के लिए भारत के पास अपनी अलग एजेंसी होगी. जिसका नाम रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी है. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों पर कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) ने डीएसआरओ के गठन को मंजूरी दे दी है. इस एजेंसी को स्पेस में युद्ध के लिए तकनीकों और प्रोद्यौगिकियों को विकसित करने का काम सौंपा गया है. अब भारत की सेनाएं इतनी शक्तिशाली हो चुकी है कि वो आकाश, धरती और जल के बाद अंतरिक्ष में भी दुश्मन को मात दे पाएंगी ।

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अंतरिक्ष में भारत का वर्चस्व 

अंतरिक्ष में अपना वर्चस्व बढ़ाने और सैन्य बलों की ताकत में इजाफा करने के लिए मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले को लेकर उच्चस्तरीय बैठक हुई थी. संयुक्त सचिव स्तर के वैज्ञानिक की लीडरशिप में एजेंसी ने आकार लेना भी शुरू कर दिया है. इस एजेंसी में जो वैज्ञानिक होंगे वो तीनों सेनाओं के साथ समन्वय स्थापित कर काम करेंगे. एजेंसी में तीनों सेनाओं के सदस्य भी शामिल होंगे. अंतरिक्ष में सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता अभी तक सिर्फ अमेरिका, रूस, चीन और जापान के पास ही थी. बताया जा रहा है कि बेंगलुरू स्थित डिफेंस स्पेस एजेंसी की जिम्मेदारी एयर वाइस मार्शल रैंक के अधिकारी को सौंपी गई है ।

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मिशन शक्ति का सफल परीक्षण

इस साल मार्च में भारत ने एंटी- सैटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण किया था. इस परीक्षण के साथ ही भारत ने स्पेस में किसी उपग्रह को मार गिराने की क्षमता हासिल की थी. इस परीक्षण से भारत ने अपने उन दुश्मनों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की क्षमता हासिल कर ली है जो युद्ध के समय भारतीय उपग्रहों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं. यह एजेंसी इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अगर दुश्मन हमारे उपग्रहों के निशाना बनाता है तो उससे संचार व्यवस्थाएं खत्म हो सकती हैं ।

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