इतिहास हमारे बीते हुए कल का आईना होता है। बीता हुए कल के बारे में अगर हमें जानना हो तो, इतिहास की किताबें ही वो ठिकाना होती है, जो हमारी ज्ञानपिपासा को शांत कर सकती हैं। उस इतिहास हमारे अतीत का अच्छा वक्त भी शामिल होता है और बुरा भी। इसीलिए बच्चों को स्कूलों में शुरूआती दौर से ही भारत के उस इतिहास से रूबरू कराया जाता है, जो हमारे बीते कल की तस्वीर होता है। हिन्दुस्तान का इतिहास वैसे तो अनगिनत आक्रमणों, राजाओं के पराक्रमों और कुरुतियों से लड़ते हुए महापुरुषों से भरा पड़ा है। जिसमें मुगलों का इतिहास भी शामिल है। भारत पर मुगलों ने लंबे वक्त तक राज किया। इनमें कुछ मुगल राजा बेहद क्रूर हुए तो कुछ महान भी और इन्हीं के इतिहास को हम स्कूलों में पढ़ते आए हैं। लेकिन अब महाराष्ट्र के बच्चे शायद ही उस इतिहास से रूबरू हो पाए, क्योंकि सरकार ने जो फैसला लिया है। वो इतिहास के साथ भेदभाव और भविष्य के साथ खिलवाड़ से ज्यादा कुछ नहीं हो सकता।

जरुर पढ़ें:  इन देशों के पास नहीं है अपनी करेंसी, दूसरे देशों की खैरात पर है जिंदा

महान अकबरताजमहल किसने बनाया? कुतुब मिनार कब बनी? लाल किले का निर्माण किसने किया ? ये सब आपको हमको पता है, लेकिन हो सकता है महाराष्ट्र की जो अगली पीढ़ी हो, वो इन सवालों के जवाब अपने बच्चों को ना दे पाए। वजह ये है, कि वहां की सरकार ने इस इतिहास को ही सिलेबस से हटा दिया है। महाराष्ट्र स्टेट एजुकेशन बोर्ड ने इस सत्र से 7वीं और 9वीं कक्षाओं की इतिहास की पुस्तकों से मुगल और सल्तनत काल के मुस्लिम शासकों का इतिहास हटा दिया है। अब बच्चे अपनी किताबों में मुगल इतिहास के बारें में नहीं पढ़ पाएंगे। ये फैसला महाराष्ट्र की बीजेपी और शिवसेना शासित सरकार ने लिया है और इसे एजुकेशन बोर्ड लागू कर रहा है। 

महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री ‘विनोद तावड़े’इतिहास का कंटेट तय करने वाली कमेटी के सदस्य ‘बापू साहेब शिंदे’ ने मुबंई मिरर को बताया कि पिछले साल स्टेट के एजुकेशन मिनीस्टर ‘विनोद तावडे’ ने आरएसएस की थिंक टैंक माने जाने वाली संस्था रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी में नए सिलेबस पर विचार-विमर्श करने के लिए एक बैठक बुलाई थी। शिंदे केे मुताबिक इस बैठक में ये तय किया..

 ‘हमें आधुनिक घटनाओं को इतिहास की किताबों में अधिक जगह देनी चाहिए, इसलिए पुराने मुगल चैप्टरों को हटा देना चाहिए’

ताजमहल

ऐसा नहीं है, कि महाराष्ट्र एजुकेशन बोर्ड 7वीं और 9वीं कक्षा की पुस्तकों में इतिहास नहीं पढ़ाएगा लेकिन मुगल सल्तनत के जगह इन्हें मराठा शासकों के बारे में पढ़ाया जाएगा। पुस्तकों में मुगलों की जगह राजा शिवाजी के पराक्रम की गाथाएं होंगी और साथ में आपातकाल का वो काला अध्याय भी जिसे कांग्रेस की इंदिरा सरकार ने देश पर थोपा था। साथ ही इन पुस्तकों में बोफोर्स घोटाले जैसी घटनाओं का भी जिक्र होगा।

जरुर पढ़ें:  मॉडल ने पहनी साढ़े 15 करोड़ रुपए की ब्रा, ये है खासीयत

किताब से इन लेखों को हटाया

महाराष्ट्र एजुकेशन बोर्ड की 7वीं की पुरानी किताबों में भारतीय उपमहाद्वीप के 9वीं और 18वी शताब्दी तक के इतिहास का जिक्र था, जिसमें अकबर के शासनकाल के बारे में भी बताया गया था। सब जानते हैं, कि अकबर मुगल वंश का सबसे शक्तिशाली और पराक्रमी राजा था। जिसका स्वप्न भारत को एक केंद्रीय सत्ता में लाने का था। इसके लिए अकबर को महाराणा प्रताप, चांद बीब और रानी दुर्गावती जैसे शासकों से सामना करना पड़ा था। अकबर के बारे में ये भी मशहूर है कि वो एक उदार शासक था, जिसने कला को सरंक्षित किया था। किताबों में ये भी पढ़ाया जाता था, कि अकबर ने  हिन्दुओं से जजिया कर हटाकर, दिन-ए-इलाही धर्म की भी स्थापना की थी। उसने सती प्रथा पर भी रोक लगाई थी। लेकिन नई छपी किताबों में इन सब बातों का जिक्र नहीं किया गया है।

जरुर पढ़ें:  लड़के ने ट्रेन में 20 साल की लड़की के सामने किया हस्तमैथुन, कहा- रेप कर दूंगा
राजा शिवाजी

इन किताबों से ये तक हटा दिया गया है, कि अफगान शासकों ने भारत में रुपए का प्रचलन शुरु किया था। इतना ही नहीं देश की पहली महिला शासक रजिया सुल्तान, महुम्मद बिन तुगलक और शेहशाह सूरी से जुड़ी सभी जानकारियों के तथ्य भी इन किताबों से हटा दिए गए हैं।

Loading...