जुनैद ये नाम तो आपको याद ही होगी, ईद से दो दिन पहले ट्रेन में भीड़ ने जुनैद को पीट-पीटकर मार डाला था। आरोप लगा था, कि एक धर्म विशेष के लोगों ने जुनैद को टारगेट कर मौत के घाट उतारा था। इस मामले पर जोरदार सियासत भी हुई। देश में गौरक्षा और बीफ के नाम पर भी भीड़ सड़कों पर ही इंसाफ कर रही है।

भीड़ के हाथों मारा गया जुनैद

ये घटनाएं इतनी बढ़ गई, कि पीएम मोदी को भरे मंच से इन लोगों को चेतावनी देनी पड़ी, लेकिन बावजूद इसके ये घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही है। अब तो हाल ये है, कि मॉब लिचिंग के खौफ की वजह से लोग अकेले सड़कों पर निकलने में डरने लगे हैं। ये हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि अलीगढ़ में एक रेलवे स्टेशन पर एक आदमी को बुरके में देखा गया।

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मॉब लिचिंग का विरोध करते मुसलमान 

भेद तब खुला जब शक के आधार पर रेलवे पुलिस ने उसे कस्टडी में लिया। तब पूछताछ में 42 साल के नजमुल हसन नाम के इंजीनियर ने बताया,

“मैं कासिमपुर पावर स्टेशन में काम करता हूं और अपने बीमार रिश्तेदार की देखभाल करने के लिए मुझे अमूमन दिल्ली जाना पड़ता है। पिछले हफ्ते जब मैं ट्रेन से दिल्ली जा रहा था, तभी स्टेशन पर गलती से एक शख्स से टकरा गया। इसके बाद उस शख्स ने और वहां मौजूद लोगों ने मेरे धर्म को टारगेट करते हुए मुझपर नस्लभेदी टिप्पणी की। गालियां दीं और जान से मारने की धमकी भी दी”।

इस घटना के बाद नजमुल हसन इतना खौफजदा हो गया, कि उसे भीड़ की मारपीट का डर सताने लगा और उससे बचने के लिए वो बुर्का पहनने को मजबूर हो गया।

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नसरुल हसन, बुरके में पकड़ा गया शख्स

हसन ने पुलिस को ये भी बताया, कि फरीदाबाद रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन में हुए जुनैद हत्याकांड के बारे में सुनकर, वो डरा हुआ था।

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