“आंटी कहती थी ‘कीड़े की दवाई’ है और खाने में मिलाकर दे देती थी. दवा खाते ही नींद आने लगती थी. सुबह जब आँख खुलती थी तो हमारे कपड़े फ़र्श पर फेंके हुए दिखते और हम बिस्तर पर नंगे होते थे. ब्रजेश अंकल हम को अपने ऑफ़िस में ले जाते. वहाँ वो हमारे प्राइवेट पार्ट को इतनी ज़ोर से स्क्रैच करते थे, कि ख़ून निकल आता. खाना खिला कर हमें ब्रजेश अंकल के रूम में ज़बरदस्ती भेजा जाता था. वहां रात को कोई मेहमान आने वाला होता था. जब हम ये गन्दा काम करने से मना करने लगते, तो आंटी हमारे पेट पर लात से मारती थी. हमें कई रोज़ तक भूखा रखा जाता. खाना माँगने पर आंटी गर्म तेल और गर्म पानी हम पर फेंक देती थी.”
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ये बातें किसी काल्पनिक कहानी का हिस्सा नहीं है और ना ही किसी फिल्म के डायलॉग है. खून खौला देना वाला ये सच सुशासन बाबू के बिहार का है, जिसे मुज़फ़्फ़रपुर के ‘सेवा संकल्प बालिका गृह’ की बलात्कार पीड़िता बच्चियों ने अपने टेस्टिमोनी में बताया है. जिन बच्चियों ने ये बातें बताई हैं, उनकी उम्र कुछ सात से दस साल के बीच है.

बिहार राज्य महिला आयोग की टीम को रक्सौल की एक लड़की ने जो बताया वो बेहद खौफनाक है, शर्मनाक है. लड़की ने  बताया, कि खाना खाते ही उन्हें गहरी नींद सताने लगती थी। कुछ मिनट बाद ही वे बेसुध हो जाती और सुबह जब आंख खुलती थी तो शरीर में असहनीय पीड़ा होती थीं. जब कभी वो पहले से रह रहीं अपनी सहेलियों से इस बारे में शिकायत करतीं तो वे मुंह फेरकर चली जाती थीं. संचालक या प्रबंधन भी कोई मदद नहीं करता था.

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ब्रजेश ठाकुर का बालिका गृह

यहां की जिस लड़की से बात करें उसके पास अपनी दर्दभरी कहानी है. आश्रय के नाम पर इनकी न सिर्फ इज्जत को लूटा गया बल्कि इन्हें वो दर्द दिया गया है, जो ताउम्र ये भूल नहीं पाएंगी. 16 साल की एक लड़की ने जो बताया वो इससे भी भयावह है. बेहोशी की दवा खाने की वजह से उसकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी. जब उसे सच्चाई पता चली तो उसने दवा मिला खाना खाने से इनकार कर दिया. ब्रजेश ने उसे अपने दफ्तर बुलाया और खाना खाने के लिए मजबूर किया. लड़की ने कह दिया, कि मुझे पता है, मेरे साथ बेहोशी में क्या होता है? आप मुझे मारो-पीटो मत, मैं हर काम करने के लिए तैयार हूं. इसके बाद ब्रजेश ने उसे शाबाशी दी और कपड़े उतारने को कहा. फिर उसने अपने मोबाइल से उस लड़की का अश्लील वीडियो बनाया. उसने ये वीडियो नेताओं और अधिकारियों को भेजेने की बात की थी, जिनके साथ लड़की को रात गुजारनी थी।

पुलिस गिरफ्त में आरोपी ब्रजेश ठाकुर

सोचिए जो बच्चियाँ अपने माँ-बाप से बिछड़ चुकी हैं. जो अनाथ हैं, उन्हें सुरक्षित माहौल देने का वादा कर यहां लाया गया था और उनके साथ हो क्या रहा था, बलात्कार और वो भी कहां? एक ऐसे कैंपस में जिसके बग़ल से ‘प्रातःकमल’ अख़बार छप कर निकल रहा है और इस घिनौने काम को अंजाम देने वाला कोई और नहीं, बल्कि उसी ‘प्रातः कमल’ अखबार का मालिक ब्रजेश ठाकुर था.

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ब्रजेश ठाकुर… हिंदी अख़बार ‘प्रातःकमल’, उर्दू अख़बार ‘हालात-ए-बिहार’ और अंग्रेज़ी अख़बार ‘न्यूज़ नेक्स्ट’ का मालिक है. इसके अलावा वो समाज सेवा के नाम पर लड़कियों और महिलाओं के उत्थान के लिए पाँच ‘शेल्टर होम’ भी चलाता है, इसके लिए  उसे बिहार सरकार लगभग एक करोड़ रुपए की अनुदान राशि हर साल देती है. ठाकुर साहब एक वृद्धाश्रम भी चलाते हैं. मुज़फ़्फरपुर में ठाकुर को वृद्धाश्रम, अल्पावास, खुला आश्रय और स्वाधार गृह के लिए भी टेंडर मिले हुए थे. खुला आश्रय के लिए हर साल 16 लाख, वृद्धाश्रम के लिए 15 लाख और अल्पावास के लिए 19 लाख रुपए मिलते है. ठाकुर पर सरकारी महकमा इस कदर मेहरबान रहा है, कि अब उसके पास किसी सवाल का जवाब नहीं है. किसी एक NGO को एक साथ इतने टेंडर कैसे मिले? इस सवाल का जवाब न बिहार का समाज कल्याण विभाग दे रहा है और न बाल संरक्षण विभाग.

बालिका गृह से गिरफ्तार महिला

अब आप ख़ुद ही अंदाज़ा लगाइए, कि ऐसे रसूखदार आदमी के सामने कौन आवाज़ उठाता. बालिका गृह के आस-पास रहने वाले लोग बताते हैं, कि उन्हें बालिका गृह के अंदर से चीख़ने-चिल्लाने और रोने की आवाज़ें आती थीं. लेकिन ब्रजेश ठाकुर के रौब और धौंस के आगे वे कुछ पूछने तक की हिमाक़त नहीं कर सकते थे. ब्रजेश ठाकुर के रुतबे के सामने सारे नियम बौने थे. बालिका गृह में बच्चियों के यौन शोषण के मामले में 31 मई को ठाकुर के ख़िलाफ़ FIR दर्ज हुई और उसी दिन बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग ने उसे पटना में मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत एक और अल्पावास का टेंडर दे दिया, जिसके लिए उसे हर महीने एक लाख रुपए मिलेंगे.

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बालिका गृह में छानबीन करती पुलिस

अब इस मामले में बालिका गृह से सात महिलाएं भी गिरफ्तार की गई हैं। इन पर लड़कियों को प्रताड़ित करने से लेकर बाहरी लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करने के जघन्य आरोप लगाए गए हैं। ब्रजेश ठाकुर के बालिका गृह में 2015 से 2017 के बीच तीन बच्चियों की मौत हो चुकी है. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ  सोशल साइंस की रिपोर्ट के बाद जांच शुरू हुई तो इन मौतों को लेकर भी चर्चा शुरू हुई…. सिटी एसएसपी हरप्रीत कौर का कहना है कि शहर के सरकारी अस्पताल से इन मौतों की बिसरा रिपोर्ट मंगवाई गई तो मौत की वजह बीमारी बताई गई है. इन मौतों के बाद भी ब्रजेश ठाकुर को बालिका गृह का टेंडर मिलता गया. यह टेंडर इन बेटियों की ज़िंदगी में उम्मीद भरने के लिए था पर इन बच्चियों ने जो आपबीती बताई है उसे सुन ऐसा लगता है कि यह टेंडर रेप और यौन प्रताड़ना के लिए दिया गया था….अब सवाल आपसे कि इसके लिए जिम्मेदार कौन… सरकार….प्रशासन..हम- आप या पूरा समाज….जिसने बलात्कार किया वो भी हममें से ही कोई थी… जिसने इन चीखों को सुनकर अनसुना किया वो भी हममें से ही थी… तय आपको करना है…गुनहगार कौन?

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