लगातार बैठक और लंबी खीचतान के बाद आखिरकार बिहार में बीजेपी सत्तारूढ़ पार्टी एनडीए के साथ सीटों का बंटवारा हो गया है. सीटों का बंटवार भी कुछ महत्वपूर्ण मानकों पर किया गया है. जिसमें बिहार की 40 सीटों पर बीजेपी 17, जेडीयू 17 और एलजेपी 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. इसके साथ ही रामविलास पासवान को राज्यसभा भेजने का फैसला हुआ है.

इस सिलसिले पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया कि एनडीए 2014 लोकसभा से भी ज्यादा सीटें जीतेगी.  शाह ने कहा कि कौन कहां से चुनाव लड़ेगा इसकी जानकारी बाद में दी जाएगी. वहीं इस मौके पर नीतीश कुमार और राम विलास पासवान ने कहा कि एक बार फिर केंद्र में एनडीए की सरकार बनेगी. प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह, नीतीश कुमार, राम विलास पासवान, चिराग पासवान मौजूद रहे.

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बता दें कि बिहार में एनडीए के सहयोगी रहे उपेंद्र कुशवाह की बगावत के बाद चिराग पासवान ने भी बागवाती तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे. इसके बाद बीजेपी ने आनन फानन में गठबंधन को बचाए रखने के लिए बैठकें की और इस फॉर्मूले पर पहुंचे. इस पूरी कवायद में जेडीयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर की भी बड़ी भूमिका बताई जा रही है.

दरअसल इससे पहले NDA में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी ने भी सीटों के बंटवारे को लेकर खुद को NDA से अलग कर लिया था. अब कुशवाहा की पार्टी बिहार के महागठबंधन में शामिल हो गई है.

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अगर बात करें 2014 के लोकसभा चुनाव का तो इस वक्त बीजेपी बिहार की 40 सीटों में से 30 पर लड़ी थी, और उसे 22 सीटों पर जीत मिली थी. एलजेपी ने सात और आरएलएसपी ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. एलजेपी ने छह सीटों पर और आरएलएसपी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की थी. 2014 लोकसभा चुनाव में जेडीयू और कांग्रेस दो-दो, आरजेडी चार और एनसीपी एक सीट जीती थी.

दोनों दलों के बीच गतिरोध की एक बड़ी वजह एलजेपी प्रमुख राम विलास पासवान को राज्यसभा भेजे जाने की मांग थी. पासवान को राज्यसभा भेजे जाने पर बीजेपी ने हामी भर दी है. संभावना है कि अगले साल असम से खाली हो रही दो राज्यसभा सीटों में से एक पर रामविलास पासवान को राज्यसभा भेजा जाएगा.  आपको बता दें कि 2009 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद 2010 में रामविलास पासवान पहली बार बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गए थे.

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