दुनिया में सबसे ज़्यादा यूज़ किए जाने वाले गूगल का डूडल हर रोज कुछ नया होता है। क्या, आज आपने गूगल खोलकर देखा है। अगर नहीं, तो अभी ज़रुर देख लीजिए । क्योंकि गूगल ने आज जो डूडल बनाया है, वो बिलकुल आलू और आलू के छिलके जैसे दिख रहा है, जी हां, वैसे आज कोई पोटेटो डे नहीं है, और ना ही आलू की पैदाइश का आज दिन है। फिर भी गूगल डूडल पर आलू क्यों ? 

दरअसल आज गूगल डूडल ईवा एकेब्लड नाम की महिला को समर्पित है। आज ही के दिन यानी, 10 जुलाई 2017 को ईवा एकेब्लड का 293वां बर्थ डे है। यकीनन आप नहीं जानते होंगे, कि ईवा एकेब्लड कौन थीं ? जिनके बर्थ डे पर गूगल भी डूडल के ज़रिए उन्हें याद कर रहा है। तो हम आपको बता दें, कि काउंटेसी ईवा एकेब्लड स्वीडन की कृषि वैज्ञानिक थीं।  जिन्होने पहली बार आलू से स्टार्च निकालने का तरीका ढूंढ निकाला था साथ ही पार्टियों में पिए जाने वाली ड्रिंक वोदका, मूनशाइन और पोटैटो वाइन अल्कोहल ईवा एकेब्लड ने ही बनाई थी। जिस आलू को आज हम सब्जी के तौर पर बड़े चांव से खाते हैं, वो आलू एक दौर में स्वीडन में जानवरों का चारा समझा जाता था। लेकिन ईवा एकेब्लड ने इस आलू को आज इतना अहम बना दिया है।

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ईवा एकेब्लड की शादी सिर्फ 16 साल की उम्र में कर दी गई थी। ईवा ने 7 बच्चों को जन्म दिया था, जिसमें उन्हें एक बेटा और 6 बेटियां हुई थीं। ईवा रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंस में जगह पाने वाली महिला साइंटिस्ट में से एक थीं। आपको जानकर ये हैरानी होगी, कि 1658 में जब पहली बार आलू आने शुरु हुए थे तब लोगों ने आलू को इंसानों के खाने के लायक नहीं माना था। बल्कि ये सिर्फ जानवरों को ही खिलाया जाता था। ईवा ने 24 साल की उम्र में आलू की खेती कर उस पर एक्सपेरिंमेंट करना शुरु कर दिया। ईवा को ये पता था, कि जर्मनी में आलू से अल्होकल बनाए जाते हैं। लेकिन, ईवा ने स्वीडिश में जानवरों को खिलाया जाने वाले आलू से आटा बना कर दिखाया। पहले जहां अनाज से अल्कोहल बनाया जाता था, उस प्रकिया को एकेबल्ड ने खत्म कर दिया और आलू से अल्कोहल बनाना शुरु किया। 15 मई 1786 में ईवा एकेब्लड की मृत्यु हो गई थीं।

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