आधार, जो देश में रहने वाले व्यक्ति की पहचान का एक आधिकारिक दस्तावेज़ है, आधार से आपको राशन मिल सकता है, बैंक खातों के केवायसी में काम आ सकता है, मोबाइल सिम दिलवा सकता है, लेकिन आज तक शायद ही किसी ने सोचा हो, कि आधार कार्ड ये भी काम कर सकता है। जीहां आधार कार्ड ने ऐसा काम कर दिखाया है, जिसे पुलिस भी नहीं कर पा रही थी।

आधार,  सरकार जिसे अनिवार्य करने की ओर कदम दर कदम बढ़ा रही है, वो एक किसान की जिंदगी में इतनी बड़ी खुशी लेकर आया है, जो उसे जमाने की कोई भी दौलत नहीं दे सकती। आधार कई लोगों के लिए एक नंबर हो सकता है, कईयों के लिए कागज़ का एक टुकड़ा, जिसपर तस्वीर के साथ आपके घर का पता और आपसे जुड़ी कुछ जानकारी होती है। लेकिन इंदौर के एक किसान के लिए ये आधार कार्ड वाकई उसके जीवन का आधार बनकर आया है।

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इंदौर से लापता नरेंद्र

दरअसल इंदौर के निरंजनपुर में रहने वाले रमेशचंद्र का मंदबुद्धी बेटा दो साल पहले गुम हो गया था। रमेश ने इसकी तहरीर थाने में दी, पुलिस ने खोजबीन की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। थकहार कर रमेशचंद्र भी अपने बेटे को भूल चुका था, उसके लौटने की आस छोड़ चुका था, लेकिन एक चमत्कार हुआ दो साल बाद उसके बेटे के सुरक्षित होने की उसे खबर मिली और ये सब हुआ उस आधार की वजह से जिसे रमेशचंद्र ने नरेंद्र के लिए बनवाया था।

नरेंद्र के पिता रमेशचंद्र  
ऐसे किया ‘आधार’ ने कमाल

मामला ये है, कि नरेंद्र इंदौर से लगभग 1400 किलोमिटर दूर बेंगलूरु के एक आनाथ आश्रम में जा पहुंचा था और वहीं रह रहा था। बेंगलुरु के जिस आनाथालय में नरेेंद्र रहता हैं, उसमें 4 दिन पहले आधार कार्ड बनने का कैप लगाया गया था, जब 20 साल के नरेंद्र के फिंगरप्रिंट लिए और रेटिना स्कैन की, तो सोफ्टवेयर ने आधार कार्ड बनाने से रोक दिया। क्योंकि नरेन्द्र का आधार कार्ड पहले ही बना हुआ था। फिंगरप्रिंट के आधार पर सॉफ्टवेयर ने नरेंद्र के पते के साथ ही पूरी जानकारी सामने लाकर रख दी। इसके बाद आनाथालय ने इंदौर जिला प्रशासन से संपर्क किया, पुलिसथाने में रिपोर्ट दर्ज थी ही, इसलिए पुलिस ने भी इसके गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने का हवाला दिया।

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पिता रमेश चंद्र और कलेक्टर निशांत वरवडे

मामले में इंदौर कलेक्टर निशांत वरवडे ने एसडीएम और सामाजिक न्याय विभाग को आदेश दिया और नरेंद्र को र्बेगलुरु -पिता दोनों दौंड़े-दौड़े थाने पहुंचे। दो साल बाद अपने बिछड़े बच्चे से मिलने के बाद रमेश की आखों में खुशी के आंसू छलक आए और अपने बेटे से मिलाने के लिए कलेक्टर को उन्होंने खूब धन्यवाद दिया।

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