एक ज़माने में ‘राजा हरिश्चंद्र’ नाटक आया था, इसे एक बच्चे ने देखा और इस नाटक का उसपर इतना गहरा असर हुआ, कि उसने आजीवन सच बोलने का प्रण ले लिया और बाद में वो बालक पूरी दुनिया में महात्मा गांधी के नाम से फेमस हुआ। बताने का मतलब ये है, कि नाटक या फिल्म या टीवी का में देखी हुई चीजें का हमारे जीवन पर इतना गहरा असर होता है, कि हमें वो बदलकर रख देती है। लेकिन ये इंसान पर निर्भर करता है, कि वो टीवी, फिल्म या नाटक से क्या सीखता है। क्योंकि दिल्ली के एक लड़के ने टीवी से वो सीखा जिसने उसकी जिंदगी पूरी तरह से बदलकर रख दी। टीवी एंटरटेनमेंट का एक ज़रिया है, लेकिन ये सिर्फ एंटरटेनमेंट ही नहीं करता, अगर सीखना चाहे तो ये लोगों को बहुत कुछ सिखाता भी है। लेकिन हम क्या सीखते हैं, ये हमपर निर्भर करता है। दिल्ली के ऐसे ही एक युवा ने डिस्कवरी चैनल से वो सीखा जिसने पूरी दिल्ली की पुलिस की नाक में दम कर दिया और वो पुलिस के लिए एक चुनौती बन गए थे।

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दरअसल दिल्ली में लगातार एटीएम मशीन तोड़कर चोरी की घटनाएं सामने आ रही थी। पुलिस के लिए ये बदमाश एक चुनौती बन गए थे। क्योंकि ये एटीएम मशीन को तोड़कर उनमें से पैसे नहीं, बल्कि मशीन की हार्ड डिस्क और डीवीआर चुराते थे। पुलिस के सामने सवाल ये था , कि ये चौर एटीएण मशीन तोड़ने के बाद भी पैसे क्यों नहीं चुराकर ले जाते हैं। ये जब चोरी करते तो सीसीटीवी को भी ऑफ कर जेते थे, जिससे इनके चेहेरे भी एचीएण की सीसीटीवी में नहीं आते थे।

लेकिन चोर कितना भी शातिर क्यों न हो, वो पुलिस की पहुंच से ज्यादा दिनों तक दूर नहीं रह सकता। आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद ये दोनों शातिर चोर पुलिस के हाथ लगे और इसके बाद उन्होंने एटीएम लूट की जो कहानी सुनाई उसे सुनकर पुलिस भी गैरान हो गई।  दोनों बदमाशों ने पुलिस पूछताछ में बताया, कि उन्होंने एटीएम तोड़ना डिस्कवरी चैनल से सीखा है। ये इतनी सफाई से इसकाम को अंजाम देते, कि किसी को भनक नहीं होती थी। ये चोर अब तक दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से 35 एटीएम मशीनों को तोड़ कर चुके थे। ये दोनों शातिर चोर इन वारदातों को पिछले 2 महीने से अंजाम दे रहे थे।

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ठाकुरगंज इलाके के हुसैनाबाद में रहने वाला मो.इरफान और रामगंज इलाके में रहने वाला मो. शादाब, ये दोनों चोर हाईस्कूल पास थे। दोनों ही मोबाइल और कार रिपेयरिंग का काम किया करते थे। पूछताछ ने इरफान ने पुलिस को बताया, कि वो पिछले एक साल से एटीएम तोडने की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। दोनों चाहते थे, कि वो अपने सभी सपने पूरे करे, जिसके लिए उन्होंने चोरी का रास्ता अख्तियार किया। उन्हें एटीएम तोड़कर उसमें चोरी का आइडिया डिस्कवरी चैनल से मिला था, जिससे सीखकर उन्होंने एटीएम मशीनों को तोड़कर उसमें चोरी करना शुरू किया, लेकिन वो एटीएम के कैश बॉक्स को नहीं तोड़ पा रहे थे। इसलिए सिर्फ हार्ड डिस्क और डीवीआर ही चुराकर उसे मार्केट में बेचकर अपना काम चलाते थे। 

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ऐसे करते थे चोरी?

दोनों ही सुनसान रात को चोरी करने निकलते थे, किसी सुनसान इलाके के एटीएम को निशाना बनाते थे। पहले एटीएम बूथ मे घूसकर एटीएम मशीन का स्क्रीन पैनल डाउन कर देते और फिर उसकी हार्ड डिस्क और डीवीआर निकालना शुरु कर देते। जिससे कैमरे काम करना बंद कर देते थे, इसके बाद दोनो कैश बॉक्स तोड़ने की कोशिश करते। हालांकि एक बार भी वे कैश बॉक्स तोड़ने में कामयाब नहीं हुए। इसके बाद दोनों डीवीआर और हार्ड डिस्क को नाजा मार्केट में बेच दिया करते थे। जिससे उन्हे पांच हजार रुपए मिलते थे। एटीएम की तोड़-फोड़ वो प्लास और पेंचकस की मदद से किया करते थे। जो उनके पास हमेशा होते थे।

फिलहाल, आलमबाग पुलिस ने दोनो ही चोरों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। दोनों के पास से हाइक विज़न कंपनी और तोशीबा कंपनी की दो-दो डीवीआर और पल्सर बाइक बरामद की है। इनके पास वो प्लास और पेंचकस भी बरामद किया गया है, जिससे वो वारदातों को अंजाम देते थे।