कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को एंट्री देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए. फैसला महिलाओं के हक में दिया था.

लेकिन लगता है कि ये फैसला केरल की महिलाओं को रास नहीं आ रहा है. तभी महिलाओं ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है. सुनकर आपको हैरानी हो रही होंगी लेकिन ये सच है. महिलाएं ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है. ये महिलाएं नहीं चाहती कि कोई भी महिला सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करें.

दरअसल कल सबरीमाला मंदिर की मासिक पूजा के लिए गेट खोले जाने है. लेकिन इससे पहले ही मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को रोकने के लिए केरल में बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. बता दें कि बीजेपी ने अपने सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर ‘सबरीमाला बचाओ अभियान’ शुरू किया है.

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इसमें बड़ी तादात में पार्टी कार्यकर्ता भगवान अय्यप्पा की तस्वीर होथों में लिए शामिल हुए. इस सिलसिले में मंदिर बोर्ड ने मंदिर के मुख्य पुजारियों और राज परिवार के साथ बैठक भी बुलाई है. इसमें 17 नवंबर से शुरू होने वाले सालाना उत्सव की तैयारियों को लेकर चर्चा होगी.

बता दें कि प्रदर्शन करने वाले संगठनों का कहना कि वे 17 अक्टूबर को होने वाली मासिक पूजा में महिलाओं को प्रवेश नहीं लेने देंगे. इसके लिए जरूरत पड़ी तो वे मंदिर परिसर के गेट पर भी लेट जाएंगे. इसके अलावा कांग्रेस और राज्य के कई हिंदू संगठनों भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.

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आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी. क्यों कि पहले यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी. 12वीं सदी के इस मंदिर में भगवान अय्यप्पा की पूजा होती है.

और मान्यता है कि अय्यपा, भगवान शिव और विष्णु के स्त्री रूप अवतार मोहिनी के पुत्र हैं.. भगवान अय्यप्पा के दर्शन के लिए हर साल यहां लगभग 5 करोड़ लोग आते हैं.. और इस मंदिर की व्यवस्था का जिम्मा राज्य में मंदिरों का प्रबंधन देखने वाले त्रावणकोर देवस्थानम बोर्ड के हाथ में है.

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