बनारस के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, BHU की छात्राएं सुरक्षा को लेकर तीन दिन से यूनिवर्सिटी के गेट बाहर अनशन पर बैठी थीं जिनपर पुलिसिया लाठीचार्ज ने मामले को और बिगाड़ दिया। रविवार को लड़कियों ने पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ साइलेंट मार्च भी निकाला, लेकिन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का ये कोई पहला विवाद नहीं है, इससे पहले ही ये यूनिवर्सिटी ऐसे कई विवादों की वजह से सुर्खियों में आ चुकी है।

BHU Student Protest for statue

कलात्मक मूर्ति पर विवाद

यूनिवर्सिटी में मधुवन नाम की जगह पर दशहरा के दौरान दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है और इसी मधुवन के बीचों-बीच लगभग 20 फिट ऊंची महिला की कलात्मक मूर्ति लगी है, जिसे 40 साल पहले यूनिवर्सिटी के ही फाइन आर्ट्स के स्टूडेंट ने बनाया था, लेकिन अक्टूबर साल 2015 में अचानक मूर्ति को किसी ने स्कर्ट-टॉप पहना दिया था। जिसको लेकर जमकर विरोध हुआ था, जिसके बाद इस मूर्ति को पहले की तरह ही कर दिया गया था।

जरुर पढ़ें:  ग़जब- अब पेट्रोल-डीजल से नहीं, कॉफी से चलेगी बस
BHU Student Protest for library

लाइब्रेरी को लेकर विवाद

बीएचयू में 24 घंटे लाइब्रेरी ना खोलने पर भी विवाद हो चुका है, 23 मई 2016 को छात्रों ने मांग की थी, कि यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरी बनाई जाए, ताकि बच्चों को पढ़ने का मौका मिले। इसको लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान भी छात्रों पर लाठी चार्ज किया गया था। इस लाठीचार्ज में कई स्टूडेंट को चोंटें भी आई थीं। इतना ही नहीं अनशन करने वाले स्टूडेंट को सस्पेंड तक कर दिया था, इस मामले में वीसी ने कहा था, कि जो लोग लाइब्रेरी की मांग कर रहे हैं, वो साल मे एक बार भी लाइब्रेरी नहीं जाते हैं।
BHU Student Protest for Suspend prof. Sandeep Pandey

प्रोफेसर संदीप पांडेय को निकालने पर विवाद

पांच जनवरी 2017 को नक्सल समर्थक होने के आरोप में मैग्सेस पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय को यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया था, इसका पत्र खुद वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने जारी किया था। हालांकि इसमें वजह नहीं बताई गई थी, संदीप पांडेय यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर थे, इसके खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया था। 22 अप्रैल 2017 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संदीप पांडेय की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया था।
Kashi Hindu University

हॉस्टल को लेकर विवाद

बीएचयू में लड़कियों के लिए बने हॉस्टल के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस दर्ज कराया गया था, जो इसी साल 29 अगस्त को हुआ है जो अभी पेंडिंग पड़ा है। कोर्ट इस मामले मे सुनवाई के लिए तैयार है। बता दें, लड़कियों का आरोप है कि रात 8 बजे के बाद हॉस्टल नहीं छोड़ सकती हैं, वो लाईब्रेरी भी नहीं जा सकती हैं,जबकि लड़के रात के 10 बजे तक लाइब्रेरी जाते हैं और लड़कियां को हॉस्टल में वाई-फाई लगाने की भी इजाजत नहीं है। इतना ही नहीं, उनके कपड़ों पर भी तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जाती हैं, और वो हॉस्टल में नॉन-वेज भी नहीं खा सकती हैं। रात 10 बजे के बाद फोन पर बात नहीं कर सकती है, इन्हीं सभी नियमों को लेकर लड़कियां सुप्रीम कोर्ट तक पंहुच गई थीं, लेकिन वीसी ने इस नए नियमों का बचाव किया था।
BHU sir Sunderlal hospital

मरीजों की मौत पर विवाद

यूनिवर्सिटी के सुंदर लाल अस्पताल मे ऑक्सीजन की कमी होने की वजह से कई मरीजों की मौत हो गई थी, ये मामला 6 और 7 जून का था। इस मामले मे भी काफी हंगामा हुआ था, यहां तक की इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंच गया था, लेकिन वीसी का कहना था, कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है, वही इस घटना में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के पास लाइसेंस तक नहीं था। कोर्ट ने इसम मामले की सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर की तारीख तय की है।
Loading...