चुनाव से पहले सबकी निगाहें अय़ोध्या पर टिकी है.  सांधू संत और हिंदू संगठनों के लोगों ने तो 2019 से पहले राम मंदिर के निर्माण का एलान भी कर दिया है. लेकिन मामला अभी कोर्ट में पेंडिग है इसलिए ये मुमकिन नहीं है. लेकिन खबर ये है कि अयोध्या राम जन्मभूमि मामले से जुड़े एक अहम केस में सुप्रीम कोर्ट 28 सितंबर को अपना फैसला सुना सकता है. सुप्रीम कोर्ट इस बात पर फैसला देगा कि मस्ज़िद में नमाज़ पढ़ना इस्लाम का आतंरिक हिस्सा है या नहीं. इस बात पर फैसला सुनाने के बाद ही टाइटल सूट के मुद्दे पर फैसला आने की संभावना है.

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राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फौसला

1994 में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने फैसला दिया था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का इंट्रीगल पार्ट नहीं है, इसके साथ ही राम जन्मभूमि में यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया गया था, ताकि हिंदू धर्म के लोग वहां पूजा कर सकें. अब कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि क्या 1994 वाले फैसले की समीक्षा की ज़रूरत है या नहीं. कोर्ट ने 20 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा था. बता दें कि टाइटल सूट से पहले ये फैसला काफी बड़ा हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट की एडवांस सूची के मुताबिक ये फैसला लिस्ट में शामिल है. आपको बता दें कि 1994 के फैसले में पांच जजों की पीठ ने कहा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का इंट्रीगल पार्ट नहीं है. 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए एक तिहाई हिंदू, एक तिहाई मुस्लिम और एक तिहाई रामलला को दिया था.

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1994 में राम मंदिर पर कोर्ट का फैसला
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