आत्मरक्षा का अधिकार हर किसी को होता है. लेकिन आत्मरक्षा का मतलब ये नहीं होता कि आप देश में गृहयुद्ध के हालात पैदा कर दें. इस वक्त देश में मॉब लिंचिंग को लेकर माहौल काफी गरम है. हाल हीं में बिहार और झारखंड में हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं के बाद पूरा देश मांग कर रहा है इसके खिलाफ सख्त कानून की. जिससे लिंचिंग करने वाले इन भेड़ियो को इसके नाम से भी डर लगने लगे.

मौजूदा सरकार इस समय मॉब लिंचिंग के खिलाफ  कानून बनाने का  भरोसा दे चुके है. तो वहीं कुछ लोग कानून के ठेकेदार बनकर मॉब लिंचिंग जैसे बड़े और गंभीर मुद्दे पर कानून को अपने हाथ में लेने की सलाह दे रहे है. हालांही में यूपी के सपा विधायक नाहिद हसन का एक वीडियो काफी वायरल हुआ था जिसमें वो मुसलमानों से बीजेपी समर्थित दुकानदारों से सामान न खरीदने की अपील कर रहे थे. तो वहीं अपने बयानों से विवादों में रहने वाले ( AIMIM )  प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी  के छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने भी मॉब लिंचिंग पर विवादित बयान दिया , जिसमें उन्होंने मुसलमानों को मॉब लिंचिंग के खिलाफ शेर बनने को कहा था.

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लेकिन अब ये शख्स तो इनसे भी आगे निकल गया. ये खबर सुर्खियों में इसलिए भी है कि जो शख्स मॉब लिंचिंग से बचने का उपाय बता रहा है वो खुद सुप्रीम कोर्ट का वकील है. सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद परचा. जिन्होंने लखनऊ की टीले वाली मस्जिद में मुसलमानों को हथियारों के लाइसेंस लेने के लिए फॉर्म भरने की ट्रेनिंग दी. ये ट्रेनिंग इस लिए दी गई क्योंकि कानून को कुछ ज्यादा ही पढ़ चके महमूद बाबू का कहना है कि जो लोग मॉब लिंचिंग का शिकार हो रहे वो SC , St  और मुस्लिम तबक़े के लोग हैं.  इसलिए उन्हें अपनी हिफ़ाज़त के लिए हथियारों के लाइसेंस की ज़रूरत है. और हर किसी को आत्मरक्षा का अधिकार संविधान से मिला है. महमूद ने ये फॉर्म भरने की ट्रेनिंग मस्जिद में जुमे की नमाज़ के लिए आए मुसलमानों को दी. उनका कहना है कि वो इस तरह 12 जगहों पर मुसलमानों को ट्रेनिंग देंगे जिसकी अगली ट्रैनिंग दिल्ली में होगी.

आपको बता दें कि कुछ वक्त पहले महमूद परचा ने इसका ऐलान लखनऊ में मशहूर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद के साथ किया था  लेकिन मौलाना कल्बे जव्वाद इस मुहिम से अलग हो गए हैं. ये वही मौलाना है जिन्होंने कुछ दिन पहले ही आत्मरक्षा के नाम पर लोगों को हथियार खरीदने की नसीहत दी थी. लेकिन अब उनका कहना है कि गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें आश्वासन दिया है कि मॉब लिंचिंग के खिलाफ जल्द कानून बनाया जाएगा.

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लेकिन लोगों को कानून का ज्ञान बांटने वाले महमूद परचा ये भूल ही चुके हैं कि आत्मरक्षा का मतलब ये नहीं होता कि जब देश में मॉब लिंचिंग के लिए कानून बनाने पर विचार किया जा रहा है. तो ऐसे में आप लोंगों को आत्मरक्षा का पाठ पढाए. ये सिर्फ लोगों में दूसरे समुदाय के प्रति हीन भावना पैदा करेगा. और ये घटनाएं रुकने की बजाए बढ़ती चली जाएगी. अगर इस तरह हर समुदाय और जाति आपनी आत्मरक्षा के लिए हथियार ऱखने लगे तो मॉब लिंचिंग पर लगाम कैसे लगाया जाएगा?  ये सवाल हम आपके लिए छोड़ रहे है.

मॉब लिंचिंग की घटनाएं जरूरी तो नहीं कि जाति, धर्म, समुदाय देख कर ही की जाता हो. देश में आए दिन ऐसा होता है जब छोटी छोटी बातों पर भी लोग कानून को अपने हाथ में ले लेते हैं. चोरी और एक्सीडेंट जैसी घटनाओं में लोग जब जिम्मेदार शख्स की बेहरहमी से मार मार कर हत्या तक कर देते है तो क्य़ा उससे पहले ये सवाल पूछा  जाता है कि वो SC/ ST  है या वो मुसलमान है. ऐसी होने वाली तमाम घटनाओं में जब किसी एक दो केस में पता चलता है मारा गया शख्स  SC/ ST  या मुसलमान है तो इसे और भुनाने के लिए क्या कुछ नहीं किया जाता है. ताकि देश में जाति धर्म की खाई और गहरी हो जाए. एक वेबसाईट के आंकड़ो के अनुसार पिछले चार सालों में मॉब लिंचिंग के 134 मामले सामने आए हैं जिसमें 50 प्रतिशत मुस्लिम है. और बाकि 50 प्रतिशत अन्य धर्म के लोग हैं. तो ऐसा नहीं है मॉब लिंचिंग की घटना सिर्फ धर्म विशेष के आधार पर हो रही है. कहते है ना कि भीड़ की कोई शक्ल नहीं होती. उनका कोई दीन-धर्म नहीं होता और इसी बात का फायदा हमेशा मॉब लिंचिंग करने वाली भीड़ उठाती है. तो क्या ऐसे में मॉब लिंचिंग को धर्म का एंगल देना सही है ?

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