देश की सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भले ही कितने दावे किए हों या कड़ी से कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए हों लेकिन आज भी महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार हमारे देश को कलंकित कर रहे है. आज भी इस देश में सैंकड़ों महिलाएं दहेज प्रताड़ना जैसी गंभीर परेशानियों से जूझ रही हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने देश की महिलाओं की लिए एक बड़ा फैसला लिया है.

ये फैसला उन महिलाओं के हित में लिया गया है जो अपने दहेज या प्रताड़ना के चलते ससुराल से अलग रह रही हैं या फिर ससुराल से निकाल दी जाती है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार अपने ससुराल से निकाली गई महिला अलग रह रहे अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ उस जगह पर ही मुकदमा दर्ज कर सकती है जहां वो वर्तमान में रह रही है.

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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिकार क्षेत्र के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला दिया जहां एक शादीशुदा महिला दहेज उत्पीड़न तथा प्रताड़ना के मामले में अलग रह रहे अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके अलावा जहां महिला शादी के पहले और बाद में रह रही थी, जिस जगह पर उसने शरण ले रखी है वहां से भी वो विवाह संबंधी मामले दर्ज करा सकती है. सुप्रीम कोर्ट के इल फैसले से ये साफ हो गया है कि अब महिला जिस जगह भी रह रही है वो वहीं से विवाह संबंधी मामले दर्ज करा सकती है. बता दें कि  सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला उत्तर प्रदेश की रुपाली देवी की याचिका पर आया है.

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