किन्नरों की दुनिया आम आदमी से हर मायने में अलग होती है। जिनके बारे में काफी कम लोगों को इनसे जुड़ी जानकारियां होती हैं। कुछ ऐसी जानकारियां जिनके बारे में शायद ही आपको पता हो। तो आज किन्नरों से जुड़ी कुछ ऐसी बातें हम आपको बताएंगे। जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएगें। वैसे तो किन्नर भारत के उन लोगों में शुमार हैं, जो हर काम को रीति-रिवाज़ों के साथ किया करते हैं, लेकिन क्या आपको ये पता है, कि एक किन्नर के मर जाने पर उसका अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है। शायद नहीं, तो जानिए

ऐसे होता है किन्नरों का अंतिम संस्कार…

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आम लोगों की तरह किन्नरों का अंतिम संस्कार सबके सामने नहीं किया जाता है। माना जाता है, कि अगर किसी किन्नर के अंतिम संस्कार को आम इंसान देख ले, तो मरने वाले का जन्म फिर से किन्नर के रुप में ही होता है। इसीलिए बाकी धर्मों से उलट किन्नरों की अंतिम यात्रा दिन की जगह रात में निकाली जाती है। ताकी अंतिम यात्रा गोपनीय रहे।

 दूसरी बात, हिन्दू धर्म में जहां इंसान के मर जाने के बाद उसे जलाया दिया जाता है। ठीक उससे उलट किन्नरों को कभी नहीं जलाया जाता बल्कि इनके शरीर को दफनाया जाता है।

तीसरी, चौंका देने वाली बात ये कि, अंतिम संस्कार से पहले हर किन्नर को जूतों और चप्पलों से पीटा जाता हैं। कहा जाता है इससे उस जन्म में किए सारे पापों का प्रायश्चित हो जाता है। इतना ही नहीं, अपने समुदाय में किसी की मौत होने के बाद किन्नर अगले एक हफ्ते तक खाना नहीं खाते हैं।

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किन्नरों की खास बात ये भी है, कि वे किसी सदस्य की मौत के बाद उसके मरने का शौक नहीं मनाते। बल्कि वे खुश होते हैं। क्योंकि इनका मानना है, कि मौत के बाद किन्नर को नरक रुपी जिन्दगी से मुक्ति मिल जाती है। मौत के बाद किन्नर समाज खुशियां मनाते हैं और अपने अराध्य देव अरावन से मांगते हैं कि अगले जन्म में मरने वाले को किन्नर ना बनाएं ।

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