दुनिया के कई मुल्कों में खास तौर पर मुस्लिम देशों में महिलाओं के लिए काफी सख्त कानून हैं, कहीं वो खुलकर कपड़े नहीं पहन सकती, तो कही बिना पति की इजाजत के ना घूमने जा सकती है यहां तक कि उनके हँसने और खेलने पर भी पाबंदियां हैं। लेकिन अब इन मुस्लिम देशों की सोच महिलाओं के लिए बदल रही है, इसका नमूना सऊदी अरब के हाल के कई फैसलों से मिला है, जो महिलाओं को आजादी देने वाले हैं। अब सऊदी अरब के बाद मुस्लिम देश ट्यूनीशिया ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने मुस्लिम महिलाओं को एक कट्टर कानून के दायरे से आजाद कर दिया है।

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आपको बता दें, कि ट्यूनीशिया में मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं के शादी को लेकर बेहद ही कड़ा कानून था, इस कानून के मुताबिक मुस्लिम महिला किसी भी गैर-मुस्लिम मर्द से शादी नहीं कर सकती थी। भले ही वो उससे प्यार ही क्यों न करती हो, लेकिन अब इस कानून को ट्यूनीशिया सरकार ने खत्म करने का फैसला ले लिया है। ट्यूनीशिया की 99 फीसदी आबादी मुस्लिम है, और अब इस देश की महिलाओं और लड़कियों के लिए खुशी के बात ये है, कि वो अपने मनपंसद लड़के से शादी कर सकेंगी।  इससे पहले ट्यूनीशिया में 1956 में बहुविवाह पर पाबंदी लगाई गई थी। साथ ही इस कानून में अगर कोई बलात्कारी किसी पीडित लड़की के साथ शादी कर लें। तो, उसकी सजा भी माफ हो जाती थी। लेकिन जुलाई में ट्यूनीशिया की संसद ने महिलाओं से जुड़े इस क्रूर कानून के प्रावधान को खत्म कर दिया था अब एकबार फिर ट्यूनीशिया अपने नए कानून को लेकर चर्चा में है।

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इस पुराने कानून के खत्म होने के बाद अब किसी और धर्म का शख्स भी मुस्लिम लड़की से शादी कर सकता है, इससे पहले अगर किसी और धर्म का कोई लड़का मुस्लिम लड़की से शादी करना चाहता था, तो उसे इस्लाम कबूल करना पड़ता था और धर्म परिवर्तन का प्रमाण-पत्र बतौर सबूत पेश करना पड़ता था। लेकिन अब नए नियम की घोषणा के बाद ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति बेंजी कैड एस्बेसी के प्रवक्ता ने महिलाओं को इस नियम से छुटकारा पाने पर बधाई दी।

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आपको बता दें, कि ट्यूनीशिया के 1973 के कानून को खत्म करने के पीछे राष्ट्रपति एस्बेसी का बड़ा योगदान बताया जा रहा है। पिछले महीने राष्ट्रपति एस्बेसी ने महिला दिवस के मौके पर इस बात को कहा था, कि अपना जीवन साथी चुनने में ‘शादी कानून’ बड़ी अड़चन पैदा करता है। इस कानून को 2014 में स्वीकार किए गए ट्यूनीशिया के संविधान का भी उल्लघंन माना जा रहा था। फिलहाल, इस कानून को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, लेकिन वही इस कानून को खत्म करने पर ट्यूनीशिया में कई संगठनों ने अलग-अलग स्तर पर अभियान चलाना शुरु कर दिया है।

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